शिवरात्रि 2018 विशेष- ये है पूर्व का सोमनाथ, बस एक शर्त के चलते आज तक अधूरा है ये शिव मंदिर

शिवरात्रि 2018 विशेष- ये है पूर्व का सोमनाथ, बस एक शर्त के चलते आज तक अधूरा है ये शिव मंदिर

Deepesh Tiwari | Publish: Feb, 09 2018 08:11:00 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

इस मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग लगभग 7.5 फुट लम्बा और 17.8 फुट परिधि वाला है।

भोपाल। भगवान शिव को हिन्दुओं में देवों के देव महादेव के नाम से भी जाना जाता है। देश में कई जगह इनके मंदिर होने के साथ ही कुल द्वादश ज्योतिर्लिंग भी हैं। इस बार फरवरी में महाशिवत्रि का त्यौहार पड़ रहा है, जो इस साल यानि 2018 में 14 फरवरी को मनाया जाएगा।

शिवरात्रि हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है, इस त्योहार को पूर्ण श्रृद्धा व भक्ति से मनाया जाता है। शिव का त्योहार होने के चलते यहां हम आपको एक ऐसे शिवमंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पूर्व का सोमनाथ भी कहा जाता है, लेकिन मान्यता है कि बस एक शर्त ने इस मंदिर को कभी पूर्ण निर्मित नहीं होने दिया। जिसके चलते ये शिव मंदिर आज तक अधूरा बना हुआ है।

भगवान शिव के वैसे तो देशभर में कई ऐतिहासिक और चमत्कारिक मंदिर है, लेकिन मध्यप्रदेश में भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर है जिसकी छत न बनी होने के कारण यह आज तक अधूरा है। यह मंदिर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 32 किलोमीटर की दूरी पर भोजपुर में स्थित है। इस मंदिर को भोजेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

भोजेश्वर या भोज मंदिर को पूर्व का सोमनाथ भी कहा जाता है। इस मंदिर की ये खासियत है कि इस मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग लगभग 7.5 फुट लम्बा और 17.8 फुट परिधि वाला है। इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि इस शिवलिंग का निर्माण एक ही चट्टान को काट कर किया गया है। इस शिवलिंग को दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है।

राजा भोज के द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था। राजा भोज के नाम पर ही इस मंदिर का नाम रखा गया था। कहा जाता है इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक शर्त लगी थी। यह मंदिर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 32 किलोमीटर की दूरी पर भोजपुर में स्थित है। इस मंदिर को भोजेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

अधूरे रहने की ये है वजह:
इस मंदिर का निर्माण अधूरा रह गया था। यह अधूरा क्यों रह गया इसके पीछे इतिहास में कोई प्रमाण नहीं मिलते हैं, लेकिन ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर एक ही रात में बनाया गया था, लेकिन छत का काम पूरा होने से पहले ही सूर्योदय हो गया इसलिए काम छोड़ दिया गया था।

14 फरवरी को है इस बार महाशिवरात्रि...
यूं तो हर महीने की कृष्णपक्ष चतुर्दशी को मास शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली महाशिवरात्रि की प्रधानता मानी गई है। महाश‍िवरात्र‍ि का महत्‍व इस वजह से भी है क‍ि माना जाता है कि इसी द‍िन श‍िव और पार्वती का व‍िवाह हुआ था। हालांकि मान्‍यता ये भी है कि महाशिवरात्रि पर ही शिवज्योति प्रकट हुई थी।

महाशिवरात्रि पर भक्‍त लंबी-लंबी कतारों में लगकर भोलेनाथ की पूजा करते हैं। इस द‍िन श‍िवलिंग पर जल चढ़ाने का भी प्रावधान है। ये भी माना जाता है कि अव‍िवाह‍ित कन्‍याएं अगर महाशिवरात्रि का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करें तो उनके व‍िवाह में आने वाली तमाम अड़चनें दूर हो जाती हैं और उनको सुयोग्‍य वर मिलता है।

वर्ष भर में 12 शिवरात्रियां:
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार वैसे तो वर्ष भर में 12 शिवरात्रियां आती है लेकिन इन सभी में फाल्गुन माह की शिवरात्रि को सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है। वैसे तो इस व्रत को कोई भी रख सकता है लेकिन महिलाएं और लड़कियां इस व्रत को बड़े शौक से रखती है।

माना जाता है, इस व्रत के प्रभाव से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है और जिन महिलाओं का विवाह हो चुका है उनके पति का जीवन और स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहता है।

शिवरात्रि पर इनका महत्व:
इस दिन शिवलिंग पर धतूरा और बेलपत्र चढ़ाने का खास महत्व होता है। इसके बाद वे उन्हें किसी मीठी चीज से भोग लगाती है। भोग लगाने के पश्चात् धुप दिप आदि जलाकर उनकी पूजा अर्चना करती है और शिव जी की आरती जाती है। इस दिन उपवास रखने का बेहद ख़ास महत्व होता है।

महाशिवरात्रि 2018 की पूजा विधि...
महाशिवरात्रि के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद मंदिर जाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। दर्शन करने यह प्रक्रिया दोपहर तक चलती है और उसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। शाम को एक बार फिर दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इस मौके पर मंदिरों में भगवान शिव की मूर्तियों का दूध, गुलाब जल, चंदन, दही, शहद, चीनी और पानी आद‍ि से अभिषेक किया जाता है।

महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर बिल्वपत्र, बेलपत्र का फल और धतूरा चढ़ाया जाता है। महाशिवरात्रि पर व्रत भी रखा जाता है और इस दौरान पूरा द‍िन भक्त अन्न का सेवन नहीं करते। हालांकि एक व‍िध‍ि के तहत कुछ भक्त रात्रि में पूजन से पहले सांयकाल में भोजन कर लेते हैं।

साल 2018 में महाशिवरात्रि के शुभमुहूर्त ...
महाशिवरात्रि का पर्व 13 फरवरी 2018 दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त ? 13 फरवरी की आधी रात से शुरू होकर 14 फरवरी तक रहेगा।

- शिवरात्रि निशिता काल पूजा का समय रात 12:09 बजे से 13:01 am तक रहेगा। मुहूर्त की अवधि कुल 51 मिनट की है।

- 14 फरवरी को महाशिवरात्रि का पारण होगा। पारण का समय सुबह 07:04 से दोपहर 15:20 तक रहेगा।
रात्रि के समय भगवान शिव का पूजन एक से चार बार किया जाएगा। यह भक्तों पर निर्भर करता है कि वे किस तरह महादेव की पूजा करना चाहते हैं।
रात्रि पहले प्रहर पूजा का समय : शाम 18:05 से 21:20 तक
रात के दूसरा प्रहर में पूजा का समय : रात 21:20 से 00:35 तक
तीसरा प्रहर पूजा का समय = 00:35 से 03:49 तक
चौथा प्रहर पूजा का समय = 03:49 से 07:04 तक

भगवान शिव को प्रसन्न करने के आसान उपाय-
- 'ॐ नमः शिवाय:' पंचतत्वमक मंत्र है इसे शिव पंचक्षरी मंत्र कहते हैं। इस पंचक्षरी मंत्र के जाप से ही मनुष्य संपूर्ण सिद्धियों को प्राप्त कर सकता है।भगवान शिव का निरंतर चिंतन करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

- व्रती दिनभर शिव मंत्र 'ॐ नमः शिवाय:' का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहें। रोगी, अशक्त और वृद्ध दिन में फलाहार लेकर रात्रि पूजा कर सकते हैं।

- शिवपुराण में रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा का विधान है। माना जाता है कि इस दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए। रात को जागरण कर शिवपुराण का पाठ सुनना हर व्रती का धर्म माना गया है।

- श्री महाशिवरात्रि व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। स्नान, वस्त्र, धूप, पुष्प और फलों के अर्पण करें। इसलिए इस दिन उपवास करना अति उत्तम कर्म है।

- सभी प्रकार के पापों का नाश करने और समस्त सुखों की कामना के लिए महाशिवरात्रि व्रत करना श्रेष्ठ है।

- रात को भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा बड़े भाव से करने का विधान है।

भगवान शिव को दूध, दही, शहद, सफेद पुष्प, सफेद कमल पुष्पों के साथ ही भांग, धतूरा और बिल्व पत्र अति प्रिय हैं। इन मंत्रों का जाप करें-‘ओम नम: शिवाय ‘, ‘ओम सद्योजाताय नम:’, ‘ओम वामदेवाय नम:’, ‘ओम अघोराय नम:’, ‘ओम ईशानाय नम:’, ‘ओम तत्पुरुषाय नम:’। अर्घ्य देने के लिए करें ‘गौरीवल्लभ देवेश, सर्पाय शशिशेखर, वर्षपापविशुद्धयर्थमर्ध्यो मे गृह्यताम तत:’ मंत्र का जाप।

रात को शिव चालीसा का पाठ करें। इसके अतिरिक्त पूजा की प्रत्येक वस्तु को भगवान को अर्पित करते समय उससे सम्बन्धित मंत्र का भी उच्चारण करें। प्रत्येक प्रहर की पूजा का सामान अलग से होना चाहिए।

ये चढ़ाएं और ये न चढ़ाएं भगवान भोलेनाथ पर...
- केसर, चीनी, इत्र, दूध, दही, घी, चंदन, शहद, भांग,सफेद पुष्प, धतूरा और बिल्व पत्र।
- जल: ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
- बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिएं, खंडित पत्र कभी न चढ़ाएं।
- चावल सफेद रंग के साबुत होने चाहिये, टूटे हुए चावलों ना चढ़ायें।
- फूल ताजे ही चढ़ायें, बासी एवं मुरझाए हुए न हों।
- शिवलिंग पर लाल रंग, केतकी एवं केवड़े के पुष्प अर्पित नहीं किए जाते।
- भगवान शिव पर कुमकुम और रोली का अर्पण भी निषेध है।

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