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सौर ऊर्जा की रोशनी में ट्रैनिंग लेगी पुलिस, सीएपीटी की छत से पैदा होगी 9 लाख यूनिट बिजली

रुफटॉप पर लगेगा प्लांट, 1.38 रुपए प्रति यूनिट में मिलेगी

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solar energy

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भोपाल. केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (सीएपीटी), कान्हासैया के भवनों की छतों पर 650 किलोवॉट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाया जाएगा। इससे हर साल 9 लाख 50 हजार यूनिट बिजली पैदा की जाएगी। यहां पैदा होने वाली बिजली महज 1.38 रुपए प्रति यूनिट में मिलेगी। शुक्रवार को मेसर्स क्लीनटेक सोलर नई दिल्ली (निवेशक) और सीएपीटी के बीच पॉवर पर्चेस एग्रीमेंट किया गया है।

यह प्लांट दिसंबर-2019 तक पूरा हो जाएगा और यहां बिजली का उत्पादन भी शुरु हो जाएगा। इस प्लांट पर निवेशक द्वारा करीब 2.60 करोड़ रुपए निवेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सौलर प्लांट लगाने का शिलान्यास किया। यह प्लांट रेस्को मॉडल पर आधारित होगा, जिसमें सीएपीटी को बिना किसी तरह का निवेश किए, 25 साल तक 1.38 रुपए की दर से बिजली मिलेगी।

ऊर्जा विकास निगम व नवीन व नवकरणीय ऊर्जा विभाग ने सरकारी संस्थानों के भवनों पर रेस्को मॉडल के तहत इस तरह के सौलर प्लांट लगवाया जा रहा है। इसके तहत ही सीएपीटी की छतों पर यह प्लांट स्थापित होगा।

विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस की मौजूदगी में विश्व बैंक की आर्थिक मदद से यह प्लांट लगाया जा रहा है। निवेशक क्लीनटेक सोलर कंपनी इसे लगाएगी। इसको लेकर अनुबंध किया गया है। यह प्लांट 25 साल तक काम करेगा और इस अवधि तक सीएपीटी को बेहद सस्ती दर पर बिजली मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा एक समय सोर ऊर्जा फैशन होता था, लेकिन अब यह सबसे सस्ती हो गई है। किसी ने यह नहीं सोचा था कि इतनी सस्ती बिजली भी मिलेगी। एक समय नवकरणीय ऊर्जा के बारे में बात करते थे तो लोग गोबर गेस तक इस ऊर्जा को समझते थे। लेकिन आज सबसे सस्ती बिजली पैदा की जा रही है, जो सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने इसे सोलर एनर्जी क्रांति बताया और कहा कि इसमें अभी और काम करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा से हम रोजगारोन्मुखी काम करना चाहते हैं। इससे ई-रिक्शॉ चलाया जा सकता है।

पहले साल होगी 57 लाख की बचत

एक अनुमान के अनुसार पहले साल ही सीएपीटी को जितनी बिजली की आवश्यकता होती हैं, यदि वह मौजूदा बिजली कंपनियों से बिजली खरीदता है तो 70 लाख रुपए का एक साल में भुगतान करना पड़ता है। जबकि 1.38 प्रति यूनिट से अब महज सीएपीटी प्रबंधन को 13 लाख रुपए ही खर्च करना पड़ेगा। पहले साल ही 57 लाख रुपए की बचत संस्थान को होगी। इस तरह 25 साल में सीएपीटी को जहां इस प्लांट से करीब 15 करोड़ रुपए की बचत होगी वहीं, हाइड्रो या कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता भी कम होगी। साथ ही सीएपीटी परिसर ग्रीन परिसर के रुप में अपनी पहचान बनाएगा।

क्या है रेस्को मॉडल

राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा प्लांट की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए रेस्को मॉडल अपनाया है। इस मॉडल के तहत हितग्राही संस्थान को किसी तरह की पूंजी नहीं लगाना पड़ती है। प्लांट की स्थापना के लिए वह जगह उपलब्ध करवाता है और निवेशक/डेवलपर इस प्लांट के लिए पैसा निवेश करता है। संस्थान को इसके बदले में निवेशक/डेवलपर से निर्धारित न्यूनतम टेरिफ पर 25 साल तक बिजली खरीदना होती है। ऊर्जा विकास निगम ने सीएपीटी के लिए लगाए जा रहे प्लांट के लिए न्यूनतम टेरिफ 1.38 रुपए प्रति यूनिट तय किया है।