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सोमवती अमावस्या पर महासंयोग,इस दिन ऐसे पाएं अपने पितरों का आशीर्वाद

18 दिसंबर को पडऩे वाली पौष अमावस्या सोमवार को, सर्वाथ सिद्धी योग भी, अब 2018 के 11 साल बाद होगा महासंयोग।

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somvati amavasya

भोपाल। सोमवती अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। इस बार यह योग 18 दिसंबर को बन रहा है। यही नहीं तीन साल बाद पौष अमावस्या सोमवार के दिन पड़ रही है, पौष अमावस्या के दिन सोमवती का भी विशेष संयोग बन रहा है।

अब यह संयोग ग्यारह साल बाद 2028 को आएगा। माना जाता है कि इस दिन नदियों और तालाबों में स्नान के बाद मंदिरों में पूजा करने पर बिशेष पुण्य मिलता है। ज्योतिष शास्त्रियों के मुताबिक इन योग संयोग से पूजा पाठ का महत्च और बढ़ जाता है। सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित स्त्रियां अपने पति की लम्बी आयु के लिए करती हैं। इसे अश्वत्थ (पीपल) प्रदक्षिणा व्रत भी कहते हैं।

पितृदोष की शांति के लिए दुर्लभ योग
ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश शर्मा के अनुसार पितृ दोष की शांति के लिए यह दुर्लभ योग माना जाता है। जिन लोगों का राशियों में चांडाल योग, विष योग, अमावस्या दोष, काल सर्प दोष, पितृ दोष हैं, ऐसे व्यक्ति इस दिन दोष का निवारण कर सकते हैं।
अमावस्या के दिन अमा नाम की किरण की प्रधानता रहती है। सूर्य और चंद्र की युति सोमवार के दिन होने से सोमवती अमावस्या का योग घटित होता है। इस दिन गंगा स्नान, तीर्थ स्नान करने के बाद दानपुण्य करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पितृ शांति के लिए पूजा पाठ का यह उत्तम योग है। पितृ शांति के लिए गौ को चारा, ब्राह्मणों को दान पुण्य करें।

यह करें इस दिन...
1. इस दिन आप पितरों का ध्यान करते हुए पीपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी, थोड़ा गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें और 'ओमपितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करें।
2. इस दिन आप सूर्य देव को ताम्र बर्तन में लाल चंदन, गंगा जल और शुद्ध जल मिलाकर ओ पितृभ्य: नम:' का बीज मंत्र पढ़ते हुए तीन बार अघ्र्य दें।
3. इस दिन दक्षिणाभिमुख होकर दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करना चाहिए। पितृस्तोत्र या पितृसूक्त का पाठ करना चाहिए।