4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक महिला डॉक्टर ने मरने से पहले कुछ ऐसा लिखा कि आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे

डॉ स्मृति लहरपुरे ने मरने से पहले पहले एक चिट्ठी अपने घर वालों के नाम लिखी थी, अब वो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।  

5 min read
Google source verification

भोपाल। मध्यप्रदेश में यह साल चुनावी साल है, यही वजह है कि सरकार की पूरी नजर इस समय हर वर्ग को साधने में है। लेकिन इन सबके बीच डॉ स्मृति लहरपुरे की आत्महत्या ने सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉ स्मृति लहरपुरे ने मरने से पहले पहले एक चिट्ठी अपने घर वालों के नाम लिखी थी, अब वो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। वह चिट्ठी सरकार और उसके सरकारी सिस्टम को आईना दिखाने के लिए काफी है। यह चिट्ठी बताती है कि कैसे मध्यप्रदेश के भीतर निजी मेडिकल कॉलेजों को मनमानी करने की छूट मिली हुई है। किस तरह से एएफआरसी के बहाने सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेज को मनमानी की छूट दे रखी है।

पिछले दिनों इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से एनेस्थीसिया विषय से पढ़ाई कर रही तृतीय वर्ष की छात्रा स्मृति (29) पिता किशोर कुमार लहरपुरे ने इंजेक्शन की ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या की वजह मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा लगातार फीस के लिए दबाव बनाना सामने आया था। बावजूद अभी तक प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई थी। उसी दौरान एक बात सामने आई थी कि लड़की ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा है, लेकिन वह पुलिस के पास नहीं है। हालांकि शायद अब पुलिस के पास भी पहुंच गया है और इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी आ गया है। जिसमें उसने मेडिकल कॉलेज की मनमानी को उजागर किया है।

मेरी मौत के जिम्मेदार हैं मेडिकल कॉलेज के मालिक सुरेश भदौरिया

मुझे माफ कर देना मम्मी, स्वामी और सूर्या...मैं डॉ स्मृति लहरपुरे पूरे होश हवास में लिख रही हूं न ही कभी मैने कोई नशे या दवाई का सेवन ही किया है। सबसे पहले मै अपनी माँ और भाईयों से माफी चाहती हूं कि मैं ऐसा कदम उठा रही हूं क्योंकि तुम तीनों ने हर विपरीत परिस्थितियों में मेरा साथ दिया, मै इन लोगों ने और नहीं लड़ सकती इसलिए मुझे माफ कर देना।

मेरी मौत के लिए सीधे तौर पर इंडेक्स कॉलेज के चैयरमैन सुरेश भदौरिया और उनके कॉलेज का मैनेजमेंट है, इनमें मुख्यरूप से डॉ के के खान हैं क्योंकि इन दोनों के द्वारा मुझे लगातार प्रताडित किया जा रहा था। मैने जून 2017 में नीट परीक्षा के माध्यम से ज्वाइन किया था।

ऐसे मनमर्जी से बढ़ती गई फीस

काउंसलिंग के दौरान मुझे जो फीस बताई गई थी उसके अनुसार टयूशन फीस 8 लाख 55 हजार और हॉस्टल फीस 2 लाख थी। इसके बाद जब मैं कॉलेज में ज्वाइन करने आई तो इंडेक्स कॉलेज प्रबंधन ने मुझसे कॉशन मनी और एक्सट्रा करिकुलर एक्टीविटी के नाम पर फिर 2 लाख मांगे। चूंकि मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूं इसलिए अतिरिक्त फीस नहीं चुका सकती थी लेकिन नीट परीक्षा के बाद बामुश्किल मिला पीजी करने का यह अवसर हाथ से न निकल जाए इसलिए मैंने 2 लाख का फिर लोन लिया, इसके बाद जैसे ही मैं ज्वाइन करने पहुंची कॉलेज प्रबंधन ने फिर दो लाख मांग लिए इसके बाद रातभर के प्रयास के बाद मैने अपनी सीट खोने के डर से मैंने यह व्यवस्था भी की लेकिन कॉलेज ने टयूशन फीस 8 लाख 55 हजार से 9 लाख 90 हजार कर दी और सभी छात्रों से यह फीस जमा करने को बोला जाहिर से अचानक एक लाख 35 हजार की फीसवृद्धि सहन करना हर किसी के लिए मुश्किल था इसलिए हम सभी लोग इसके खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट गए।


इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रताड़ित करना शुरु कर दिया इसके अलावा फोन पर भी मुझे यह केस वापस लेने के लिए धमकाया जाने लगा। इसके बाद कोर्ट ने इंडेंक्स कॉलेज को निर्धारित फीस लेने का आदेश दिया लेकिन इसके बाद फिर अगले साल 2017 में फिर 9 लाख 90 हजार मांगने लगे जो मैने जमा नहीं कर कोर्ट के अादेशानुसार 8 लाख 55 हजार ही जमा किए, इस मामले में कोर्ट जाने पर कॉलेज प्रबंधन हमे लगातार प्रताडि़त करने लगा खासकर एचओडी डॉ खान, इसके बाद इसी मामले में केस वापस लेने की शर्त पर एचओडी डॉ खान ने अमानवीय व्यवहार करते हुए सार्वजनिक तौर पर हमे 2 से 3 महीने तक ओटी और डिपार्टमेंट से बाहर निकाले रखा।

इसके बाद हमारा स्टायफंड भी काट लिया गया और बिना कारण हम पर हजारों रुपए का फाइन लगाया जाने लगा। कॉलेज प्रबंधन हमे इस समय का स्टायफंड कभी नहीं देना यदि कॉलेज में उस दौरान मेडीकल काउंसिल का दौरा और इनकम टैक्स का छापा नहीं पड़ता। मेरी एचओडी के के खान मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रताडि़त करती थी वह यह सोचती थी कोर्ट केस करने में मेरी सक्रीय भूमिका है दरअसल वह मानसिक रूप से बीमार है इसलिए वह सायकिक रोग का इलाज भी करवा रही है वह मेडीकल कॉलेज के इस प्रोफेशन के लिए फिट नहीं है खासकर एनेस्थेटिक ब्रांच के लिए। वह हर किसी को प्रताड़ित करती है पर मैं नहीं जानती कि उसे मुझसे क्या प्राब्लम रहती थी वह मेरे लीव एप्लीकेशन पर साइन नहीं करती थी और मेरे लीव पर होने पर एचआर विभाग से मुझपर हजारों रुपए का फाइन लगवाती थी।

हमें कॉलेज के भीतर प्रताड़ित किया जाता है
हम पीसी स्टूडेंट होने के बावजूद भी यहां प्रताड़ित हो रहे हैं हमारा ड्यूटी टाइम सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक है इसके बावजूद दिन में चार बार एटेंडेंस के लिए पंच करना पड़ता है, हद तो यह है कि एक दिन की लीव पर एचओडी डॉ खान ने मुझपर 4500 से 6000 रुपए का फाइन लगाया, जिसपर पहले से ही भारी लोन हो उसके लिए यह राशि भर पाना संभव नही था। कुछ दिनाे पहले मैने थर्ड ईयर की फीस जमा करने को बोला तो फिर फीस 9 लाख 90 हजार कर दी गई जिसे जमा करने से मैने मना कर दिया इस बारे में मैने डॉ अमोलकर को भी बताया था, इसके बाद चैयरमैन सुरेश भदौरिया ने मैनेजमेंट को उन सभी छात्रों से बकाया फीस वसूलने का आदेश दिया जिन्होंने कोर्ट के निर्देशानुसार फीस जमा की थी यह राशि तीन साल की प्रति छात्र चार लाख 5 हजार थी और किसी भी हालत में मैं बढ़ी हुई फीस जमा नहीं कर सकती थी। मेरे माता पिता पहले से ही बढ़ी हुई फीस के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों से रुपए उधार ले चुके थे जिनके बस में यह राशि जमा करना संभव नहीं था। मेरी उम्र में अन्य इंजीनियरिंग लॉ और अार्ट सब्जेक्ट इतना कमा लेते हैं कि अपना खर्चा उठा सकें।

जबकि मैं सिर्फ अपने घरवालों पर ही निर्भर हूं, वह भी इसलिए कि मैं एक डॉक्टर हूं। मैने स्कॉलर और स्कूलिंग रेपुटेड कॉलेज गांधी मेडीकल कॉलेज और सेंट्रल स्कूल से की है मैने इंडेक्स कॉलेज जैसा फर्जी संस्थान पहले कभी नहीं देखा था। यहां कोई इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्था डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के लिए नहीं है। इन्होंने अभी भी रिश्वत और धमकी देकर एमसीआई की मान्यता हासिल की है। मान्यता के दौरान मैने खुद इनके कंसलटेंट के फर्जी दस्तावेज और फर्जी साइन देखे हैं। ये लोग सिर्फ पीजी स्टूडेंट को प्रताडि़त करने में लगे हैं और खुद की नाकामी का आरोप हमपर लगाकर फीस बढ़ाते हैं और आए दिन हमारा स्टायफंड काटते रहते हैं। आधी रात को इनके इशारे पर शराब पीकर कुछ लोग स्टूडेंट के पास भेजे जाते हैं और लोग हमसे कोरे कागज पर साइन मांगते हैं। जो पीजी स्टूडेंट साइन करने से मना कर देता है उसपर अगले दिन मेडीकल सुप्रीटेंडेंट बिना कारण के हजारों रुपए का फाइन लगा देता है। यह असहनीय है मैं इतने इतनी प्रताड़ना और लूट सहते हुए इतने दबाव में काम और पढ़ाई नहीं कर सकती। इसलिए मैने इससे मुक्त होने का निर्णय लिया है मैं हमेशा इन लोगों से नहीं लड़ सकती।

मैं जानती हूं मैं सुरेश भदौरिया के सामने बहुत छोटी हूं पर मैं अपने माता पिता और परिवार को कर्ज और लोन के बोझ तले नहीं देखना चाहती। मेरी एक ही अंतिम इच्छा है कि सुरेश भदौरिया को इसके बदले में सजा मिलनी चाहिए और मेरे परिवार को मेरी पूरी फीस लौटाई जाना चाहिए। और मेरे साथ पढ़ने वाले पीजी स्टूडेंट से विनती है कि आखिर तक इकट्‌ठे रहकर एक दूसरे की मदद करते रहें। प्लीज इस कॉलेज को बंद करो जहां मरीजों की जिंदगी और कॉलेज स्टूडेंट के करियर का विनाश किया जाता हो।
-डॉ स्मृति लहरपुरे

व्यापमं और डीमेट घोटाले में फंसा है कॉलेज
इंडेक्स मेडिकल कॉलेज व्यापमं घोटाले में भी आ चुका है। इसके साथ ही सरकारी सीटों को बेचने के मामले में एएफआरसी ने इस पर भारी जुर्माना भी लगाया था। लेकिन मेडिकल कॉलेज माफियाओं के दबाव में सरकार ने एएफआरसी के तत्कालीन अपीलेट अधिकारी पीके दास को ही रवाना कर दिया था। उसके बाद से एएफआरसी मेडिकल कॉलेजों की मर्जी से ही फीस में अचानक से बढ़ोत्तरी कर रही है। सरकार ने जानबूझकर खुद को उसके नियंत्रण से बाहर कर लिया है। कुल मिलाकर परोक्ष रूप से मेडिकल कॉलेज माफियाओं को सरकार और सरकारी सिस्टम का सीधे तौर पर सहयोग मिल रहा है। यही वजह है कि उनकी मनमानी दिनों दिन बढ़ती जा रही है।