
चीनी लोक कथा के माध्यम से अफसरशाही पर किया गया कटाक्ष
भोपाल। कीर्ति बैले एंड परफार्मिंग आट्र्स द्वारा कोरियोग्राफर प्रभात गांगुली की स्मृति में शुरू हुए राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव धरोहर दशम शुक्रवार से शहीद भवन में शुरू हुआ। पहले दिन नाटक ' सीढ़ी दर सीढ़ी उर्फ तुक्के पर तुक्का' का मंचन हुआ। नाटक के अब तक 116 शो हो चुके हैं। यह प्ले पहली बार 1989 में हुआ था। नाटक का निर्देशन बंसी कौल ने किया है। कॉमेडी नाटक के माध्यम से शासन व्यवस्था और अफसरशाही पर कटाक्ष किया गया। डायरेक्टर के अनुसार यह नाटक चीनी लोक कथा थ्री प्रमोशन इन सक्सेशन पर आधारित है।
नाटक की शुरुआत एक रईस जागीरदार के अनपढ़ बेटे तुक्कू से शुरू होती है। तुक्कू अपना बचपन पतंग उड़ाने में ही बर्बाद कर देता है। उसे देख एक ज्योतिष उसे बताता है कि वह अधिकारी बन सकता है। यदि वह एग्जाम देता है तो वह अव्वल आएगा। तुक्कू उसकी बातों पर विश्वास कर तैयारी करने राजधानी पहुंच जाता है। यहां वह रात को भेष बदलकर गश्त पर निकले नवाब खामखां से हो जाती है। नवाब तुक्कू की हाजिर जवाबी से काफी खुश होता है, और उसे अफसरों की परीक्षा में शामिल करा देता है।
नवाब सौंप देता है सल्तनत
इधर, अधिकारी ये समझते हैं कि तुक्कू नवाब का खास है। इसलिए उसे पास कर दिया जाता है। एक दिन वह नवाब के दरबार में मिलने आता है। वह अपनी काबिलियत से नवाब और उसके अधिकारी को इतना प्रभावित करता है कि उसे अधिकारी बना दिया जाता है। तुक्कू को पता चलता है कि नवाब को चापलूसी बहुत पसंद है। वह उसकी सालगिरह को मनाने की योजना बनाता है।
वह एक बुजुर्ग अफसर से नवाब की तारीफ में कसीदा लिखने के लिए कहता है। उसे पता नहीं होता है कि ये बुजुर्ग उससे चिढ़ता है। बुजुर्ग तारीफ की जगह आलोचना लिख सालगिरह के मौके पर पढऩे को दे देता है। हालांकि उसका दाव तब उल्टा पड़ जाता है जब नवाब के विद्रोह हमला कर देते हैं। उसे पता चलता है कि तुक्कू ने इसमें उसका बुराइयां लिखी है। वह खुश होकर तुक्कू को अपनी सल्तनत सौंप देता है।
Published on:
23 Feb 2019 08:07 am
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