
डिग्री के बाद भी मजदूरी को मजबूर
भोपाल. शिक्षक भर्ती की परीक्षा को तीन साल पूरे होने को हैं लेकिन अब तक अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल पाई।
इस लेटलतीफी के कारण अभ्यर्थी शिक्षक बनने की आस में बेरोजगार घूम रहे हैं। हालात ये हैं कि ज्यादातर के सामने
आर्थिक संकट खड़ा हो गया है जिसके चलते मजदूरी कर दिन गुजारने पड़ रहे हैं।
प्रदेश में करीब बीस हजार शिक्षकों की भर्ती होना है। इसके लिए प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के जरिए परीक्षा आयोजित कराई गई थी।
इसमें करीब चार लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें से करीब 47 हजार ने परीक्षा क्वालीफाई की थी। इसके बाद मेरिज सूची के
आधार पर भर्ती की जाना थी लेकिन अब तक किसी को भी नौकरी नहीं मिल पाई। सत्यापन की प्रक्रिया में ही डेढ़ साल से मामला अटका
हुआ है। पूरा मामला पहले कोरोना के संक्रमण में अटक गया उसके बाद सरकारी कामकाज के बीच झूल रहा है।
लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों के मुताबिक आरक्षण को लेकर प्रक्रिया अटक गई है। कोर्ट के निर्णय के बाद कार्रवाई होगी।
राकेश डावर ने हिन्दी विषय लेकर उच्चशिक्षा हासिल की। तीन साल पहले शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की। नियुक्ति नहीं मिली।
एक अन्य अभ्यर्थी कमल ने अर्थशास्त्र से पढ़ाई की। दुकान पर काम कर रहे हैं।
अर्थशास्त्र विषय के शिक्षक के लिए कमल गिरी क्वालिफाई हुए। तीन सालों से नौकरी का इंतजार करते हुए हालत इतनी खराब
हो गई कि अब पूड़ी और भजिए पकौड़े तल कर परिवार चला रहे हैं। भोपाल स्थित डीपीआई में कई बार आवेदन देने के साथ
मंत्रियों से गुहार लगा चुके हैं।
अशोक कुमार नरवर भूगोल के लिए चयनिक शिक्षक हैं। राजगढ़ जिले में इनका परिवार है। भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण परिवार के
भरण पोषण के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है।
47 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने की थी परीक्षा क्वालीफाई
30 हजार शिक्षकों की भर्ती (स्कूल शिक्षा विभाग और ट्राइबल विभाग)
03 साल पहले हुई परीक्षा
1.5 साल से सत्यापन के बीच अटका मामला
जल्द से जल्द ज्वाइनिंग की कोशिश
शिक्षक भर्ती में सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। कोशिश की जा रही है अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द ज्वाइनिंग मिल सके।
कोर्ट के आदेश और तय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए इसे शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।
इंदर सिंह परमार, स्कूल शिक्षा मंत्री
Published on:
15 Jul 2021 03:04 am
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