इसके अलावा ऋतुओ का आगमन के दौरान कजरी, हिदुली, संबनियां, झूला, गीत गाये जाते हैं। वहीं वर्षा, कृषि, बारहमास, फगुआ, चैती, देवी, भैरव, सन्यासी आदि गीत भी गाए जाते है। गेहू बीनते वक्त, पूड़ी बेलने और जेतवा चलते हुये और खेल के दौरान भी लोक गीत गाने की परंपरा चली आ रही है। हिन्दू समाज में जन्म से लेकर मृत्यृ तक सोलह संस्कार निभाने के साथ ही लोक गीत आज भी गाए जाते हैं।