
33 साल की लंबी रेल सेवा के बाद रिटायर
भोपाल. लोहे की प्लेट जैसी कुर्सी और लोहे की ही प्लेट जैसी मेज। गार्ड के डिब्बे में यही सुविधा होती है। इसी के सहारे 50 से 55 रैक की मालगाड़ी के सबसे अंतिम छोर पर 90 के दशक में नौकरी शुरू हुई। goods train जब स्टेशन पर खड़ी होती है तब सबसे पीछे मौजूद गार्ड का डिब्बा स्टेशन के दायरे से बाहर होता है। जहां कुछ न दिखता है। तीन दशक पहले के स्टेशनों और मालगाड़ी में उपलब्ध सुविधाओं की कल्पना कीजिए। अधिक ठंड या भीषण गर्मी के दौर में अकेले जिम्मेदारियों का निर्वहन कठिन और चुनौतीपूर्ण था। लेकिन, इन्हीं सुविधाओं और चुनौतियों ने हमें फौलादी बना दिया और अब 33 साल की सेवा पूरी होने को है। 33 साल की सेवा की सीख और जिंदगी का फलसफा है कि लड़कियां ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं। वे कुछ भी कर सकती हैं।
गजब का साहस
- 1990 में बीना से भोपाल लेकर गई मालगाड़ी
- 1990 से लेकर 2012 तक मालगाड़ी की गार्ड रहीं
- 33 साल की लंबी रेल सेवा के बाद रिटायर
Published on:
30 May 2023 07:09 pm

बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
