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जानिए क्यों खास है पुष्य नक्षत्र

 ब्राह्मणों और देवताओं की पूजा करने में अटूट विश्वास, धन-धान्य की संपन्नता, बुद्धिमत्ता, राजा या अधिकारियों का प्रिय होना, भाई-बंधुओं से युक्त होना।

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Juhi Mishra

Apr 29, 2016

Pushya Nakshatra

Pushya Nakshatra

भोपाल। पुष्य नक्षत्र, नाम तो बहुत सुना है। लोगों की देखा-देखी खरीददारी भी बहुत की होगी लेकिन क्या वाकई जानते हैं कि पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ क्यों माना गया है? तिष्य और अमरेज्य जैसे अन्य नामों से भी पुकारे जाने वाले इस नक्षत्र की उपस्थिति कर्क राशि के 3-20 अंश से 16-40 अंश तक है। अमरेज्य का शाब्दिक अर्थ है, देवताओं के द्वारा पूजा जाने वाला। शनि इस नक्षत्र के स्वामी ग्रहों के रूप में मान्य हैं, लेकिन गुरु के गुणों से इसका साम्य कहीं अधिक बैठता है। ज्योतिषाचार्य पंडित अवेधश कुमार से जानिए पुष्य नक्षत्र के कारण और प्रभाव...

शनि है पुष्य का स्वामी
विंशोत्तरी दशा में पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि को माना गया है, इसलिए नक्षत्र में शनि के गुण-दोषों को भी देखना जरूरी माना जाता है। जिस जातक का जन्म शनियुक्त पुष्य नक्षत्र में होता है उसमें धर्मपरायणता, बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता, विचारशीलता, संयम, मितव्ययिता, आत्मनिर्भरता, गंभीरता, शांत प्रकृति, धैर्य, अंतमुर्खी प्रकृति, संपन्नता, पांडित्य, ज्ञान, सुंदरता और संतुष्टि होती है।

यह है राशि पर प्रभाव
ऐसे जातक किसी भी कायज़् को योजनाबद्ध तरीके से करना पसंद करते हैं। लेकिन कभी-कभी ये शंकालु प्रवृत्ति वाले और कुसंगति में पड़ जाने वाले भी हो सकते हैं। इनके जीवन में 35 से 40 की उम्र अत्यंत उन्नतिकारक होती है। विवाह में कुछ विलंब हो सकता है और कई बार इन्हें अपने परिवार में कठिन परिस्थितियां भी देखना पड़ती हैं। अच्छे प्रबंधन के कारण व्यवसाय में इन्हें निश्चित रूप से लाभ मिलता है। पर इनके लिए किसी गंभीर रोग की आशंका से इंकार नहीं किया सकता।

महिलाओं को मिलते हैं खास गुण
इस नक्षत्र में उत्पन्न स्त्रियां भी बहुत ही लजीली, शर्मीली और धीमे स्वर में वार्तालाप करने वाली होती हैं। दांपत्य जीवन में ऐसी स्त्रियों को कभी-कभी पति के संदेह का सामना करना पड़ सकता है।

धारण करें नीलम
इस श्रेणी में आने वाले जातकों को नीलम धारण करना आपके लिए शुभ होगा। इसके लिए शनिवार को ही नीलम खरीदें, फिर उसे पंचधातु या स्टील की अंगूठी में जड़वाएं। गंगाजल से उसकी शुद्धि के पश्चात- शं शनैश्चराय नम: शनि के मंत्र का जप करके सूर्यास्त से 1-2 घंटा पहले पहनें।

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