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शिमला की घंटा घड़ी, अंग्रेजों के जमाने के फोन, एक्सचेंज से लेकर बूथ तक का संग्रह

- राजधानी में देश का पहला दूर संचार संग्रहालय, दुर्लभ टेलीफोन से लेकर एक्सचेंज तक हैं जमा- देशभर से यहां लाए गए पुराने उपकरण, कम्युनिकेशन में आए बदलाव की कहानी बता रहा संग्रहालय- देखरेख के अभाव में धूल खा रहे दुर्लभ उपकरण

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भोपाल

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Shakeel Khan

Feb 22, 2024

शिमला की घंटा घड़ी, अंग्रेजों के जमाने के फोन, एक्सचेंज से लेकर बूथ तक का संग्रह

शिमला की घंटा घड़ी, अंग्रेजों के जमाने के फोन, एक्सचेंज से लेकर बूथ तक का संग्रह

शकील खान। दुनिया के किसी भी कोने में लोगों से संपर्क आसान हो गया। लेकिन कभी यह प्रक्रिया बहुत जटिल थी। लंबी लाइनों से लेकर कई उपकरणों का उपयोग होता था। इन सभी को राजधानी में देखा जा सकता है। यहां एकमात्र ऐसा संग्रहालय है जहां पूरे देश से दुर्लभ संचार उपकरणों को जमा किया गया है। इसमें वह फोन हैं जो अंग्रेज उपयोग करते थे। करीब डेढ़ सौ सालों में कम्युनिकेशन में आए बदलावों को यहां देखा जा सकता है। लेकिन वर्तमान में इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में यह धूल खा रहा है।
भारत में सबसे पहले 1881 में ओरिएण्टल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड इंग्लैंड ने कोलकाता, बोम्बे, मद्रास (चेन्नई) और अहमदाबाद में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किये थे। यहां से देश में दूर संचार सेवाएं शुरू हुई। इस दौरान में जो उपकरण इस्तेमाल किया हुए वह राजधानी के संग्रहालय में हैं। पुराने जमाने के क्लासिक टेलीफोन, प्राइवेट ब्रांच एक्सचेंज (पीबीआइ), टेलीग्राफ के जमाने से लेकर टेलीफोन तक इस संग्रह में है। अरेरा हिल्स स्थित देश के एकमात्र राष्ट्रीय दूरसंचार संग्रहालय में देखा जा सकता है।

वीआईपी के लिए होते थे अलग फोन
यहां 15 प्रकार के टेलीफोन सेट हैं, जिनमें रुतबे के हिसाब से मिलने वाले टेलीफोन भी रखे हुए हैं। तब मंत्रीगण, कलेक्टर और मजिस्ट्रेट के साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के पास खास डिजाइन के टेलीफोन हुआ करते थे। वहीं 1880 के दशक में ब्रिटिश पोस्ट आफिस में प्रयोग किए जाने वाले टेलीफोन को भी यहां देखा जा सकता है। यहां 20 लाइन कार्ड टाइप मैग्नेटो एक्सचेंज, 1930 का इलेक्ट्रोमैकेनिकल टेलीप्रिंटर, विभिन्न प्रकार के टेलीफोन एक्सचेंज और सार्वजिक स्थलों पर रखा जाने वाला टेलीफोन भी उपलब्ध है, जिसमें 50 पैसे का सिक्का डालने पर बात होती थी।

बुलैट से डिस्पैच किया जाता था तार
विद्युत टेलीग्राफ लाइन पर तार मिलते ही संबंधित तक जल्द से जल्द पहुंचाने डिस्पैच सवारी शुरू की गई। जबलपुर में 1950 में एक ऐसा ही दोपहिया वाहन संग्रहालय में संभालकर रखा गया है। इसके द्वारा लोगों तक पहुंच तार पहुंचाया जाता था। उपकरणों की नहीं हो रही देखरेख, मेंटेनेंस करने अभी कोई एजेंसी नहीं राष्ट्रीय संग्रहालय होने के बाद भी यहां जमा उपकरणों की देखरेख में कमी है। दरअसल इसे केन्द्र सरकार के अधीन व्यवस्था चली गई। इसे अपडेट करने की बात चल रही है। लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया। यहां की देखरेख करने वाला ही कोई नहीं है।
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संचार क्रांति की शुरूआत से लेकर अब तक संचार में उपयोग होने वाले उपकरण संग्रहालय में जमा? किए गए हैं। यह देश में अपनी तरह का एकमात्र संग्रहालय है। व्यवस्था सुधारने की कोशिश है। अमले की कमी के कारण दिक्कत हो रही है। सुधार के लिए को?शिश हो रही है।
महेन्द्र सिंह धाकड़, जीएम बीएसएनएल