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एफएसएसएआई के पत्र को गंभीरता से नहीं ले रहे अफसर, किस की सुनेंगे, कहने को पूरा अमला व्यस्त, कार्रवाई कहां हो रही पता नहीं

- उच्च अफसर भी नहीं दे रहे ध्यान, शराब के सैम्पल लेना तो दूर, सब्जी के सैम्पल लेना भी शुरू नहीं किया

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एफएसएसएआई के पत्र को गंभीरता से नहीं ले रहे अफसर, किस की सुनेंगे, कहने को पूरा अमला व्यस्त, कार्रवाई कहां हो रही पता नहीं

एफएसएसएआई के पत्र को गंभीरता से नहीं ले रहे अफसर, किस की सुनेंगे, कहने को पूरा अमला व्यस्त, कार्रवाई कहां हो रही पता नहीं

भोपाल. सरकार मिलावटखोरी को लेकर अभियान तो चला रही है, लेकिन शराब की जांच को लेकर अभी तक कोई सुगबुगाहट नहीं है। जबकि प्रदेश में जहरीली शराब से मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस गंभीर विषय पर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली (एफएसएसएआई) ने आयुक्त खाद्य को पत्र लिखकर राजधानी ही नहीं प्रदेश के सभी जिलों में देशी और विदेशी शराब सैम्पल की जांच के निर्देश दिए हैं। इस पत्र के आधार पर ही आयुक्त खाद्य की तरफ से सभी कलेक्टरों को आदेश जारी कर शराब के सैम्पल लेने के आदेश जारी हो चुके हैं। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों ने अभी तक इस आदेश पर अमल नहीं किया। जब एफएसएसएआई के पत्र को अफसर अनदेखा कर रहे हैं तो किस की सुनेंगे। ऐसे में ये सवाल अब खड़ा होने लगा है।

अब खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी शराब के सैम्पल ले सकेंगे। दरअसल उज्जैन, जबलपुर, मुरैना से कई शिकायतें एफएसएसएआई को गईं। इसके बाद ही ये पत्र मप्र के आयुक्त खाद्य को लिखा गया है। आबकारी विभाग के मुताबिक शहर में हर रोज करीब 25 हजार अंग्रेजी शराब की बोतल, 20 हजार बियर की बोलत और 50 हजार लीटर देशी शराब की बिक्री होती है। लेकिन इसकी गुणवत्ता को कौन जांचे।

सब्जी के सैम्पल तक नहीं लिए
दीपावली से पूर्व पुराने शहर में एक युवक नाले के पानी से सब्जी धोने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद कलेक्टर अविनाश लवानिया ने अभिहित अधिकारी संजय श्रीवास्तव को निर्देश देकर एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों ने इसके बाद किसी सब्जी के सैम्पल लेना उचित नहीं समझा। उस समय ही मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र दुबे ने दीपावली के बाद सब्जी सैम्पल लेने की बात कही थी। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो रहा। शहर में रोजाना हजारों क्विंटल सब्जी ऐसे ही खप जाती है।

जहरीले तालाब के सिंघाड़े फिर से तोडऩे लगे

यूनियन कार्बाइड के पास जहरीले तालाबों में की जा रही सिंघाड़े की खेती पर एक बार नगर निगम और दूसरी बार एसडीएम गोविंदपुरा की टीम कार्रवाई कर चुकी है। यहां सिंघाडे की खेती को नष्ट कराने के बाद सिंघाड़े तोडऩे के लिए मौखिक रूप से मना किया है। कुछ दिन बाद यहां फिर से सिंघाड़ों की खेती और उन्हें तोडऩे वाले सक्रिय हो गए। इस मामले में भी खाद्य सुरक्षा अफसरों की जिम्मेदारी बनती है कि वे मौके पर जाकर सिंघाड़ों के सैम्पल लेकर उन्हें जांच के लिए भेजें। अफसरों ने यहां भी ध्यान नहंी दिया।

टोस्ट, मसाले, रेस्टोरेंट, हॉकर्स सब की जांच बंद
इन दिनों खाद्य सुरक्षा विभाग का अमला न जाने कहां काम कर रहा है। कहने को पूरा अमला इतना व्यस्त है कि उसके पा समय नहीं है। लेकिन कार्रवाई कहां और क्या हो रही है किसी को नहीं पता। जबकि दो माह पूर्व तक यही अमला पुराने और नए शहर के टोस्ट कारखानों से मसालों की फैक्ट्री पर कार्रवाई कर सैम्पल लेता रहता था। यही नहीं ईट राइट के तहत हॉकर्स कॉर्नर और जले हुए तेल के संबंध में भी कार्रवाई होती थी। लेकिन अब एक दम पूरा मामला ठंडा पड़ गया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र दुबे अधिकतर समय व्यस्त ही रहते हैं?लेकिन कार्रवाई कहां हो रही, पता नहीं।

वर्जन

तहां तक मेरी जानकारी में है अमला काम कर रहा है। फिर भी एक बार और जानकारी की जाएगी। अगर सैम्पल नहीं हो रहे तो इसका पता किया जाएगा।
संजय श्रीवास्तव, अभिहित अधिकारी, जिला प्रशासन