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2500 साल पहले सिक्कों पर अंकित किया गया था राम वन गमन का दृश्य

राज्य संग्रहालय में 'सिक्कों की विरासत' चित्र प्रदर्शनी

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भोपाल। राज्य संग्रहालय में गुरुवार से डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान ने 'सिक्कों की विरासत' नामक प्रदर्शनी का आयोजन किया। अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर, उज्जैन के कलेक्शन में शामिल सिक्कों में राजा विक्रमादित्य, उदयादित्य, शिवाजी, शेरशाह सूरी, हर्षवर्धन से लेकर वर्तमान तक के सिक्कों को देखा जा सकता है। पुरातत्वविद डॉ. आरसी ठाकुर के संग्रह से 2500 साल पुराने सिक्के भी एग्जीबिशन में शामिल किए गए हैं। यह प्रदर्शनी 22 सितंबर तक चलेगी।

नदियों का किया गया अंकन
कण्व शासन काल में जल की महत्ता कितनी थी इसे सिक्कों के माध्यम से समझा जा सकता है। जल संरक्षण पर जारी सिक्के पर तालाब व वृक्षों के माध्यम से नदियों को प्रवाहित करने का संदेश दिया गया है। करीब दो हजार वर्ष पूर्व जारी सिक्के पर कण्व शासकों का टकसाल का चिन्ह 'वृक्ष एवं संदुक प्रकार' अंकन है। वहीं, ग्वालियर के सिंधिया शासकों के सिक्के पर महाकाल के आयुध त्रिशुल को स्थान दिया गया। प्रदर्शनी में कांसे और तांबे के सिक्कों के साथ दोस्त मोहम्मद खान द्वारा जारी किए गए उर्दू लिखित सिक्के भी हैं। वहीं, मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की मुद्रा के साथ भगवान शिव को समर्पित होल्कर कालीन मुद्राएं भी यहां देखी जा सकती हैं।

गुप्त काल की स्वर्ण मुद्राओं में गरुड़ ध्वज
समुद्र गुद्ध के स्वर्ण सिक्कों में जहां समुद्र गुप्त वीणा बजाते हुए नजर आते हैं तो 2500 सालों पुरानी मुद्रा पर राम वन गमन दृश्य को दिखाया गया। चंद्रगुप्त प्रथम व कनिष्क की स्वर्ण मुद्रा पर भगवान बुद्ध का अंकन किया गया है। वहीं, परमार वंश के शासक ने अपने सिक्कों पर शिवलिंग तथा शिव मंदिर का शिखर अंकित कराया था। इस मुद्रा पर शासक का नाम जगदेव देवनागरी में अंकित है। वहीं, खिलजी वंश के शासक गयासशाह खिलजी ने राजधानी माण्डव को बनाया था। माण्डव का नाम शादियाबाद के नाम से सुल्तानों के सिक्कों पर अंकित है। ये सिक्के चादी, तांबा और सोने के बने हैं।

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