
एक माह में दो बार किसानों को उपलब्ध करा रहे उचित प्लेटफॉर्म, कृषि विभाग ने पंजीकृत किए 500 किसान
भोपाल. राजधानी में ऑर्गेनिक खेती से सेहत का सूरज खिलता नजर आ रहा है। उद्यानिकी विभाग और कृषि विभाग के रजिस्टर्ड साढ़े सात सौ किसान और पोर्टल पर आवेदन करने वाले करीब ढाई सौ किसान ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। भोपाल से सटे मुगालिया हाट, मुगालिया छाप, गुराड़ी, परवलिया, बैरसिया सहित 130 गांवों के किसान करीब 1500 एकड़ रकबे में गेहूं, साेयाबीन, सरसों, कई प्रकार की दालें, सब्जी, लहसुन, प्याज, धनिया, काला गेंहू, हल्दी व अन्य प्रकार की फसलों की खेती कर रहे हैं। 400 एकड़ का रकबा उद्यानिकी विभाग का है। अब रबी फसल के लिए ही दोनों विभागों के सात सौ किसानों ने अपना पंजीयन करा लिया है। किसान मेहनत कर सेहत के लिए फायदेमंद फसल और सब्जी उगा रहे हैं, लेकिन बाजार में महंगे रेट में बिकने वाले ऑर्गेनिक उत्पाद किसानों से सस्ते में खरीदे जा रहे हैं। किसान जिस ऑर्गेनिक गेहूं को तीस रुपए किलो बेचता है वही गेहूं बाजार में दो गुने रेट पर बिकता है। इसमें डायबिटीज के लिए फेमस काला गेहूं भी किसान पैदा कर रहे हैं जो चेन्नई, बेंगलुरू, कलकत्ता तक जाता है।
किसान को उसके सही रेट मिलें और जनता को उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य सामग्री इसके लिए उद्यानिकी विभाग माह में दो बार उनको गुलाब उद्यान में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का मौका दे रहा है। इससे लोगों के साथ शहर का उच्च तबका भी इसकी तरफ आकर्षित हो रहा है।
कड़ी मेहनत और धैर्य से तैयार होती फसलग्रमा मुगालिया हाट के किसान सुरेश पाटीदार बताते हैं कि कड़ी मेहनत और धैर्य के बाद ऑर्गेनिक फसल तैयार होती है। यूरिया और डीएपी मिलाकर एक एकड़ में जितना लहसुन और प्याज करते हैं। ऑर्गेनिक खेती जिसमें केंचुए वाली खाद मिलाई जाती है, उसमें आधी फसल ही हो पाती है। उसके खरीददार भी कभी कभी कभी नहीं मिलते।
काला गेहूं, खपली, तुअर दाल, सरसों पैदा कर रहे
किसान ऑर्गेनिक खेती करने के लिए 12 तरह के फर्टीलाइजर का उपयोग करते हैं। मिट्टी को भी उसी तरह तैयार किया जाता है। तब कहीं जाकर ऑर्गेनिक फसल बोई जाती है। जहां यूरिया, डीएपी की फसल जल्दी हो जाती है, वहीं आर्गेनिक फसल में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।
ऑर्गेनिक गेहूं, उच्च वर्ग की पसंदकिसान राजकुमार अहिरवार बताते हैं कि ऑर्गेनिक गेहूं के नाम पर उनसे काफी लोग सम्पर्क करते हैं। इसमें उच्च वर्ग भी शामिल है। अगर उन्हें उनके गेहूं की बिक्री के लिए एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिल जाए तो उनकी आय भी दो गुनी हो जाए और लोगों की सेहत भी सुधर जाए।
कुछ लोग पैक कर ब्रांडिंग कर रहेऑर्गेनिक खेती के लिए कुछ बड़े किसानों ने 50 एकड़ तक रकबे में ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी है। वह तरह -तरह की फसल उगाकर उसे पैक कर सोशल मीडिया के माध्यम से देश ही नहीं विदेशों में भी बेचते हैं।
ऑर्गेनिक दाल, गेहूं, सब्जी के रेटकाबुली चना---150 रुपए किलो
तुअर दाल---180 रुपए किलोसरसों---180 रुपए किलो
काला गेहूं--50 रुपए किलोहल्दी---250 रुपए किलो
चावल--110-130 रुपए किलोशहद--500 रुपए किलो
जैविक लहसुन----80 से 100 रुपए किलोप्याज---50 से 60 रुपए किलो
ऑर्गेनिक धनिया---150 रुपए किलोनोट- ऑर्गेनिक खेती में काफी समय और मेहनत लगती है, इस कारण इनके रेट बढ़े रहते हैं।
वर्जनऑर्गेनिक खेती का रकबा काफी बढ़ रहा है। किसानों को इसके अच्छे रेट मिल सकें इसके लिए विभाग की तरफ से गुलाब उद्यान में माह में दो बार जैविक हाट लगाई जा रही है। उच्च वर्ग भी जैविक सब्जी, खाद्याना पसंद कर रहा है। गुड़ और घी भी जैविक पद्वति से तैयार हो रहे हैं।
बीएस कुशवाहा, उप संचालक, उद्यानिकी विभाग
वर्जनकरीब 1100 एकड़ से ज्यादा रकबे में ऑर्गेनिक खेती हो रही है। रबी की फसल के लिए पंजीयन हो रहे हैं। हमारी कोशिश है कि जिले में आधिक से अधिक किसान ऑर्गेनिक खेती करें।
सुमन प्रसाद, उप संचालक, कृषि
Published on:
15 Oct 2022 11:22 pm
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