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भोपाल। प्रदेश के सबसे बड़े ऑडिटोरियम रवीन्द्र सभागम केंद्र का किराया संस्कृति विभाग ने तय कर दिया है। 1500 सीटर हॉल(हंसध्वनि) का एक दिन का किराया 80 हजार रुपए होगा तो 212 सीटर हॉल(गौराजंनी) का किराया 40 हजार रुपए होगा। इसी तरह 80 सीटर बोर्ड रूम, 40 सीटर मीटिंग हॉल, 350 सीटर बैंक्वेट हॉल, ऑडियो रिकॉर्डिंग स्टूडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग स्टूडियो का किराया भी तय कर दिया गया है। इतना ही नहीं, रवीन्द्र भवन ऑडिटोरियम और मुक्ताकाश मंच के किराया में भी दो से पांच गुना तक बढ़ोत्तरी कर दी गई है। रवीन्द्र सभागम केंद्र को शूटिंग के लिए भी किराए से लेने की सुविधा होगी। इसका किराया शिफ्ट और दिनों के हिसाब से अलग-अलग होगा। किराया में इतनी वृद्धि के बाद रंगकर्मी विरोध पर उतर आए हैं, उनका कहना है कि हम कई साल से रवीन्द्र भवन का किराया कम करने और रिहर्सल के लिए स्पेस उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे। उल्टे विभाग ने किराया बढ़ा दिया।
अब थिएटर को मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट
नए नियमों के अनुसार दोनों ऑडिटोरियम में शास्त्रीय संगीत, नृत्य के साथ रंगकर्म के लिए किराए में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। रवीन्द्र भवन में अब तक सिर्फ शास्त्रीय संगीत और नृत्य के लिए ही ये छूट दी जाती थी। वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक बुलानी का कहना है कि हम किराया कम करने के साथ छूट की मांग कर रहे थे। विभाग ने किराया दोगुना कर छूट दी है तो इसका क्या फायदा होगा। इतना ज्यादा किराया देकर रिहर्सल करने यहां कौन आएगा।
रवीन्द्र भवन मुक्ताकाश मंच का किराया भी बढ़ाया गया
रवीन्द्र भवन प्रभारी वंदना जैन का कहना है कि रवीन्द्र भवन ऑडिटोरियम का किराया 18 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपए किया गया है। वहीं, मुक्ताकाश मंच का किराया 5 हजार से बढ़ाकर 40 हजार किया गया है। 2012 से किराए में किसी तरह की वृद्धि नहीं की गई थी। शहर के अन्य ऑडिटोरियम जैसे समन्वय भवन ऑडिटोरियम का किराया 36 हजार तो मिंटो हॉल का करीब 3 लाख रुपए है, इनकी अपेक्षा हमारे यहां ज्यादा सुविधाएं हैं, लेकिन किराया काफी कम रखा गया है। अभी सर्विस प्रोवाइडर के जरिए रवीन्द्र भवन में तकनीशियन व अन्य स्टाफ की व्यवस्था की जाएगी।
रिहर्सल स्पेस की थी मांग, लेकिन वो भी किराए पर ही मिलेगा
रंगकर्मियों के रिहर्सल के लिए अभी कोई जगह तय नहीं है। कोई स्कूल में रिहर्सल करता तो कोई गांधी भवन या अपने घर के आंगन में। शहर के रंगकर्मियों की लंबे समय से मांग थी कि उन्हें रिहर्सल के लिए स्पेस उपलब्ध कराई जाए। संस्कृति विभाग के अफसरों का कहना था कि नए ऑडिटोरियम में ये सुविधा मिलेगी, यहां सुविधा तो दी गई लेकिन उस पर चार्ज लगा दिया गया वो भी तीन घंटे का एक हजार। एक नाटक के मंचन से पहले बीस से तीस दिन तक रिहर्सल चलती है, यानी यदि यहां कोई रिहर्सल ही करता है तो उसे बीस से तीस हजार रुपए खर्च करने होंगे।
अब तो दरी बिछाकर शो करना पड़ेंगे
वरिष्ठ रंग निदेशक राजीव वर्मा का कहना है कि हम लगातार ज्ञापन सौंपकर रवीन्द्र भवन का किराया कम करने की मांग कर रहे थे। ये राशि सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए बहुत ज्यादा थी। किराया कम करने की बजाए बढ़ा दिया गया। अब संस्कृतिकर्मियों को तो दरी बिछाकर ही नृत्य-संगीत और नाटक करना पड़ेंगे। संस्कृतिकर्मियों की इतनी कमाई नहीं है कि वे ये राशि चुका सकें। मप्र में थिएटर शो भी बिना टिकट होते हैं, हम तो थिएटर का किराया भी जेब से देते हैं।
Published on:
23 Feb 2022 01:28 am

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