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मास्टर चाबी से लॉक खोलकर करते थे चोरी, फर्जी आरसी कार्ड बनाकर बिक्री

बागसेवनिया पुलिस ने 8 वाहन चोरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 35 लाख रुपए क़ीमत के 45 दो पहिया वाहन बरामद किए हैं। आरोपी मास्टर चाबी से लॉक खोलकर वाहनों की चोरी करते और फर्जी आरसी कार्ड बनाकर लोगों को वाहन बेच देते थे। शुभम मसकोले और अमित धुर्वे मास्टर माइंड हैं।

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Used to steal by opening the lock with the master key and selling it by making fake RC cards

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35 लाख रुपए क़ीमत के 45 दो पहिया वाहन बरामद
आरोपी एम्स अस्पताल की पार्किंग सहित अन्य शहरों की पार्किंग से चुराते थे बाइक

भोपाल. बागसेवनिया पुलिस ने 8 वाहन चोरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 35 लाख रुपए क़ीमत के 45 दो पहिया वाहन बरामद किए हैं। आरोपी मास्टर चाबी से लॉक खोलकर वाहनों की चोरी करते और फर्जी आरसी कार्ड बनाकर लोगों को वाहन बेच देते थे। शुभम मसकोले और अमित धुर्वे मास्टर माइंड हैं। राहुल ने अपने 10 रिश्तेदारों को बाइक बेच दी। पुलिस 140 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों तक पहुंची।

आरोपी पिछले दो साल में बागसेवनिया, एमपीनगर, टीटीनगर, पिपलानी, मिसरोद, चूनाभट्टी, कोलार, जहांगीराबाद, तलैया, कोहेफिजा, बिलखिरिया के साथ हीरानगर इंदौर, नसरूल्लागंज सीहोर से 35 लाख रुपए कीमत के 45 दो वहिया वाहनों की चोरी कर चुके हैं। पुलिस ने वाहन चोरी के मामले में शुभम मसकोले 23 साल, राहुल इवने 20 साल, अमित धुर्वे 25 साल, योगेश मेहरा 21 साल, रघुवीर कुर्रोशी 24 साल, मंजू बारीवा 22 साल, बालमुकुन्द 20 साल सभी आरोपी सिलवानी रायसेन और अरेन्द्र परते 20 साल सीहोर को गिरफ्तार किया है।

4 संदिग्धों को पकड़ा तो खुला 45 चोरियों का राज

शहर में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं पर नजर रखते हुए घटना स्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना पर 4 संदिग्धों को दीक्षानगर बागमुगालिया से पकड़ कर पूछताछ की तो आरोपियों ने अन्य दोस्तों के साथ वाहनों को चोरी करना स्वीकार किया।

शौक पूरा करने करते थे चोरी

शुभम छात्र, राहुल इवने ड्राइवर, अमित मजदूरी और योगेश मेहरा कंडेक्टरी करता था। चारो आरोपी अपने शौक पूरा करने के लिए वाहनों की चोरी करते थे। आरोपी राहुल सहरिया चोरी की गई गाडिय़ों का फर्जी रजिस्ट्रेशन तैयार करता और खुद की गाड़ी बताकर दूर-दराज के गांवों में बेंच देते थे। आरोपी चिप लगा हुआ ब्लैंक आरसी कार्ड मंगवाता था और उस पर नाम पता अंकित कर नया आरसी कार्ड बनाता था।