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भोपाल। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में पंच के करीब 4 हजार पद फिर खाली रह गए। शौचालय नहीं होने व बिजली बिल की एनओसी नहीं होने से पंच पद के दावेदार नामांकन नहीं भर पाए। बिजली बिल और पंचायत कर की पावती पेश नहीं कर पाने से साढ़े तीन सौ से अधिक की उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई। ऐसा पंचायतों के आम चुनाव के दौरान भी हुआ था, जो शर्तों को पूरा नहीं कर पाने से बड़ी संख्या में पंच पद के प्रत्याशी नामांकन नहीं भर पाए थे। राज्य निर्वाचन आयोग ने रिक्त पड़े 5433 पदों के लिए उप चुनाव कार्यक्रम जारी किया था। जिसके लिए 3 जनवरी तक नामांकन किया जाना था, लेकिन इनमें से करीब 4 हजार पंच पद के लिए एक भी आवेदन नहीं पहुंचे। इन स्थानों को अब एक बार फिर रिक्त घोषित किया जाएगा।
350 अधूरे पर्चे
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक उप चुनाव निर्वाचन कार्यक्रम में रिक्त घोषित किए गए 5433 पदों के विरुद्ध मात्र 1808 नामांकन दाखिल किए गए थे। जिन साढ़े तीन हजार पदों के लिए आवेदन नहीं आए उनमें अधिकतर में वजह दावेदारों के पास शौचालय नहीं होना था। इससे संबंधित किसी तरह का प्रमाण पत्र नहीं देना होता है। लोग गलत हलफनामा देने से बचे। दूसरी वजह बिजली के बकाया बिल ने भी नामांकन से रोक दिया। जिन उम्मीदवारों ने पर्चे भरे थे उनमें से 1454 वैध पाए गए। 354 पर्चे निरस्त कर दिए।
फिर होगा चुनाव
नियमों के मुताबिक किसी भी निकाय में रिक्त पद अधिकतम छह माह तक ही खाली रखा जा सकता है। इस अवधि में उप चुनाव कराना अनिवार्य है। पंच के खाली रह गए करीब 4 हजार पदों के लिए फिर से उप चुनाव कराया जाएगा।
नहीं हो रहा विकास
ग्रामीणों का कहना हैं कि पंचो की नियुक्ति न होने से गांव का विकास नहीं हो पा रहा। सरकार सड़क निर्माण बिजली व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं को देना चाहती है लेकिन पंचों के हजारों पद रिक्त होने से ठीक प्रकार से काम का निसपादन नहीं हो रहा। गांव में अब पानी की समस्या भी होने लगी है। ऐसे में गांव के विकास के लिए पंचों की नियुक्ति करना जरूरी है।
Published on:
06 Jan 2018 09:06 am
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