
Tropic of Cancer
भोपाल। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मेपकॉस्ट) ने राजधानी के समीप बैरसिया तहसील के ग्राम रतुआ में भी कर्क रेखा चिह्नित कर दी है। इस तरह सांची के बाद ग्राम रतुआ दूसरा प्वॉइंट होगा, जहां विज्ञान और खगोलीय गणना के क्षेत्र में काम करने वाले शोधार्थी कर्क रेखा के संबंध में अध्ययन-अध्यापन कर सकेंगे। मेपकॉस्ट ने बुधवार को कर्क रेखा लोकार्पण समारोह आयोजित किया, जिसके मुख्य अतिथि विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण रामदास रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत आज विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और इसका श्रेय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जाता है।
उन्हीं के विजन और मार्गदर्शन में विज्ञान भारती देशभर में आयोजन कर लोगों की रुचि विज्ञान के प्रति बढ़ाने में सफल हो रहा है। विज्ञान भारती देशज विज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाने, उसके प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। हम लगातार इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्र-छात्राएं, शोधार्थी और आमजन उपस्थित थे।
महाकाल मंदिर में भी सेंटर प्वाइंट स्थापित है
आज भी काल गणना कर्क रेखा के आधार पर की जाती है। काल गणना का यह तरीका अत्यंत पुराना और समृद्ध है। महाकाल मंदिर भी कर्क रेखा के सेंटर प्वॉइंट में स्थापित है। जल्द ही इस जगह को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। यहां सेल्फी प्वॉइंट तैयार करेंगे ताकि लोग अधिक से अधिक इस जगह घूमने आएं।
रतुआ से 23 डिग्री, 26 मिनट, 53 सेकंड से होकर गुजरती है कर्क रेखा
कार्यक्रम संयोजक विवेक ने बताया कि कर्क रेखा अभी तक सांची के पास दिखाई देती थी। लेकिन उसी कर्क रेखा को डीजीपीएस के माध्यम से सर्वे कर बैरसिया के ग्राम रतुआ के पास चिह्नित किया है। इस जगह पर यह रेखा 23 डिग्री, 26 मिनट, 53 सेकंड से होकर गुजरती है। मेपकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठरी ने कहा कि मेपकास्ट भोपाल से 25 किमी दूर बैरसिया मार्ग पर विस्तृत सर्वेक्षण उपरांत कर्क रेखा को चिह्नांकित है। इस क्षेत्र के स्कूली बच्चों को विज्ञान से जुड़ी हर सुविधा उपलब्ध करवाएंगे। बच्चो को मेपकॉस्ट की प्रयोगशाला का भ्रमण कराया जाएगा। हर वर्ष 21 जून को इस स्थान पर विज्ञान से जुड़ी गतिविधि का आयोजन किया जाएगा।
Published on:
22 Jun 2023 04:48 pm
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