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खाकी का खेल: एफआइआर से दो बदमाशों के नाम गायब

पीडि़त गार्ड का आरोप- सब इंस्पेक्टर ने नाम नहीं लिखाने दी थी धमकी

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खाकी का खेल: एफआइआर से दो बदमाशों के नाम गायब

भोपाल. चिनार फॉच्र्यून कैंपस के गार्ड जीतेन्द्र मिश्रा पर जानलेवा हमला करने वाले बदमाश पर मिसरोद पुलिस किस तरह मेहरबान है, इसका खुलासा एफआइआर से हुआ है। पुलिस ने हमले के मुख्य आरोपी दुष्यंत सिंह के दो साथियों के नाम ही एफआइआर में दर्ज नहीं किए। गार्ड मिश्रा का कहना है कि मिसरोद थाने का सब-इंस्पेक्टर तिवारी उसे बदमाश दुष्यंत का नाम नहीं लिखाने को लेकर धमका रहा था।

सब-इंस्पेक्टर ने धमकी दी थी कि यदि तुम दुष्यंत के दो साथियों के नाम दर्ज कराएगा तो तुम्हारे खिलाफ चेन लूट का मामला दर्ज कर जेल में बंद कर देंगे। इसके बाद सब-इंस्पेक्टर ने मुझे मेडिकल कराने के लिए 1250 अस्पताल भेज दिया। मेडिकल कराकर वापस लौटा तो पुलिस ने मुझे एफआइआर दी, जिसमें बदमाश दुष्यंत के दोनों साथियों का जिक्र नहीं मिला। इसके बाद जब मैंने सब-इंस्पेक्टर से पूछा तो वह फिर से मुझे धमकाने लगे।

शटर आधा कर रात भर चलता है धंधा
चिनार फॉच्र्यून कैंपस स्थित गल्र्स हॉस्टल के नीचे खुली दुकान रविवार रात को फिर देर रात तक खुली रहीं। पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर शुक्रवार रात करीब साढ़े दस बजे पुलिस ने दुकान बंद करा दी थी। रविवार रात चाय-नाश्ता की दुकान चलाने वाला व्यापारी आधा शटर बंदकर देर रात तक दुकान चलाता रहा।

होटल-ढाबा संचालकों पर पुलिस की मेहरबानी
देर रात खुल रहे होटल-ढावा संचालकों पर भी पुलिस मेहरबान बनी है। रविवार रात डेढ़ बजे तक ढावा होटल खुले रहे। नशे की हालत में हर रोज इन होटलों के सामने विवाद की स्थिति बनती है।

केस वापस नहीं लेने पर कार से कुचलने की दी धमकी
गार्ड ने बताया कि बदमाश दुष्यंत के लोग उसका कार से पीछा कर रहे हैं। शनिवार रात कार सवार चार युवक कैंपस में आए। वे दूसरे गार्ड से मेरे बारे में पूछ रहे थे। जब साथी गार्ड ने बताया कि वह ड्यूटी पर नहीं आया तो कार सवार उनसे कहकर गए कि बता देना दुष्यंत के खिलाफ केस वापस ले लेगा। नहीं तो कार से कुचल दिया जाएगा। इसके थोड़ी देर बाद पुलिस की डायल-100 आई। डायल-100 में तैनात एक पुलिसकर्मी कार वालों से करीब पांच मिनट तक बात करता रहा।

कैंपस में दुकानें बंद करवा रहे हैं
पीडि़त ने एक ही आरोपी का नाम बताया था। उसके बयान पर ही एफआइआर की गई थी। रात में समय में कैंपस में दुकानें बंद कराई जा रही हैं। संजीव चौकसे, टीआइ