
भोपाल। केन्द्र सरकार के आम बजट में वैसे तो आम आदमी के लिए कोई बड़ी राहत नहीं दिखाई देती, लेकिन एक पहलू ऐसा नजर आता है, जो उसके लिए कुछ मुश्किलें जरूर खड़ी कर सकता है। बात को मध्यप्रदेश के संदर्भ से समझें तो यहां पर पेट्रोल के दाम देश में सबसे ज्यादा राज्यों में शुमार हैं, इसका कारण है पेट्रोलियम कम्पनियों द्वारा बढ़ाया गया दाम, राज्य सरकार का सरचार्ज और उस पर लगने वाला सेस। बात इसी सेस की हो रही है। बजट में सेस 3 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी कर दिया गया है। इतना ही नहीं कुल आयकर पर 3 फीसदी सेस और साथ में सरचार्ज लगाने का ऐलान किया गया है।
सेस तो बढ़ा दिया गया, लेकिन बड़ी बात ये है कि क्या आम आदमी सेस के बारे में जानता है, और यदि जानता भी है तो क्या उसे वाकई पता है कि सेस का इस्तेमाल कौन और किस तरह कर रहा है। और सबसे बड़ी बात ये है कि आखिर सरकार ने राहत देने के बजाए एक छोटी से पैराग्राफ में सेस बढ़ाने का ऐलान कर कोई नया बोझ आम आदमी पर तो नहीं डाल दिया है। इन सब बातों को जानने के लिए आपको समझना होगा कि आखिर सेस है क्या और इसका इस्तेमाल अब तक वाकई कितना हो पाया है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-280 के जरिए यह व्यवस्था दी गई है कि एक वित्त आयोग बनेगा जो करों के जरिए केंद्र सरकार को मिलने वाले राजस्व में से राज्यों को हिस्सा देने का फॉर्मूला बताएगा। मतलब करों के जरिए जो राजस्व केंद्र सरकार को मिलता है, उसमें से केंद्र को राज्यों को हिस्सा देना पड़ता है। लेकिन सेस के बारे में यह व्यवस्था है कि इससे मिलने वाले राजस्व का बंटवारा केंद्र को राज्यों के साथ नहीं करना पड़ता। इसका मतलब है कि सेस के जरिए जो रकम मिलती है, वह पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथ में ही रहती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए है ताकि जिस खास लक्ष्य से सेस लगाया जाए, उसे केंद्र सरकार एक तय समयसीमा में पूरा कर सके, लेकिन इसके साथ ये भी है कि जब एक बार यह लक्ष्य हासिल कर लिया जाए तो सेस को खत्म कर दिया जाए।
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई सेस का इस्तेमाल सही ढंग से उन्हीं कामों में हो रहा है जिनके लिए सेस लगाया जा रहा है और आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ लादा जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक 2016-17 में सेस से प्राप्त होने वाला राजस्व पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 22 फीसदी बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपये हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 में सेस से केंद्र सरकार को तकरीबन 83,000 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होता था। यानि सिर्फ दो साल में सेस से मिलने वाला राजस्व तकरीबन दोगुना हो गया।
आपको याद दिला दें कि कुछ समय पहले ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी सीएजी की सेस पर एक रिपोर्ट आई थी। जिसके अनुसार सेस के जरिए सरकार को जो राजस्व हासिल होता है, उसका 41 फीसदी इस्तेमाल नहीं हुआ। सीएजी के अनुमान के मुताबिक सेस के जरिए वसूल गए तकरीबन 1.4 लाख करोड़ रुपये केंद्र सरकार के पास पड़े हुए हैं। 1996-97 में शोध एवं विकास के लिए सेस लगाया गया था. तब से लेकर 2014-15 तक इस सेस के जरिए सरकार को तकरीबन 5,700 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं। लेकिन खुद सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि इनमें से सिर्फ 21 फीसदी यानी 1,228 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल शोध एवं विकास कार्यों में हो पाया।
Published on:
01 Feb 2018 01:16 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
