
,,
भोपाल। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से दो नई वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। उन्होंने कहा था कि भारत के मध्यम वर्ग में वंदे भारत ट्रेन इतनी लोकप्रिय हो गई है कि कोने-कोने से इसकी डिमांड की जाने लगी है, अब वो दिन दूर नहीं है, जब वंदे भारत ट्रेन देश के कोने-कोने को जोड़ेगी। लेकिन इन ट्रेनों में खाली पड़ी सीटें कुछ उल्टी ही कहानी कह रही हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि जबलपुर-भोपाल की हालत तो खराब है ही, इंदौर-भोपाल वंदे भारत की स्थिति और भी बदतर है। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि इंदौर-भोपाल वंदे भारत ट्रेन वर्तमान में सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। वंदे भारत ट्रेनों का ऐसा हाल प्रदेश में ही नहीं बल्कि देशभर की कई वंदे भारत ट्रेनों का भी है। यही कारण है कि रेलवे इस ट्रेन को लेकर अब फिर से चिंतन-मनन में लग गया है। जानें क्यों हो रहा ऐसा हाल...
महंगे किराए ने तोड़ा पैसेंजर्स का दिल
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2021 को लाल किले से अपने भाषण में 75 वंदे भारत ट्रेनें चलाने का ऐलान किया था। इन सभी ट्रेनों को भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर पर यानी 15 अगस्त 2023 तक चलाने की बात कही थी। वहीं, रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि 'वंदे भारत' ट्रेन से जुड़े जो भी दावे और सोशल मीडिया पर इसके प्रति दिखने वाली दीवानगी ट्रेन की मांग के आंकड़ों से बिल्कुल ही विपरीत ही है। लोग इन ट्रेनों के चलने की खबर से जहां खुश हुए थे, वहीं अब इसके महंगे किराए ने उनका दिल तोड़ दिया है। हालत यह है कि कई रूट्स पर वंदे भारत ट्रेन से सफर करने वाले पैसेंजर्स गिनती के हैं। यही कारण है कि अब रेलवे ने पैसेंजर्स को अट्रेक्ट करने के लिए किराये में छूट की योजना पेश की है।
वंदे भारत ट्रेन के खाली डब्बे
भारत में पहली वंदे भारत ट्रेन फरवरी, 2019 में चलाई गई थी और अब तक 25 रूट्स पर कुल 50 वंदे भारत ट्रेनें दौड़ रही हैं। वहीं जुलाई 2023 में चार नई वंदे भारत ट्रेनें शुरू करने की उम्मीद भी है। लेकिन फिलहाल कई वंदे भारत ट्रेनें महज 8 कोचों के साथ चल रही हैं, फिर भी सीट खाली पड़ी हैं। इंदौर-भोपाल वंदे भारत का बुरा दौर रानी कमलापति स्टेशन (भोपाल) से जबलपुर जाने वाली वंदे भारत ट्रेन 8 कोच की ट्रेन है, फिर भी एक अप्रैल 2023 से 29 जून 2023 के बीच इस ट्रेन की औसतन ऑक्यूपेंसी केवल 32 फीसदी ही रही। वापसी में भी इस ट्रेन की हालत कुछ ऐसी ही रहती है। आपको बता दें कि इस समय सबसे बुरी हालत इंदौर से भोपाल के बीच चलने वाली 8 कोच की वंदे भारत ट्रेन की बनी हुई है। इस ट्रेन की केवल 21 फीसदी सीटों पर ही पैसेंजर्स ने ट्रेवलिंग की है। वहीं वापसी में इस ट्रेन की भी केवल 29 फीसदी सीटें ही भरीं।
सबसे आधुनिक ट्रेन पर किराया पड़ा भारी
वंदे भारत ट्रेन को यूरोपीय डिजाइन और भारत की सबसे आधुनिक ट्रेन के तौर पर पेश किया गया है। लेकिन इन आधुनिक ट्रेनों का किराया ही इन पर भारी हो चला है। शताब्दी की तरह ही मानी जानी वाली वंदे भारत ट्रेन का किराया बहुत ज्यादा है। इसीलिए कई रूट्स पर पैसेंजर्स इसमें सफर करने से बच रहे हैं। ऐसे समझें कितना महंगा है किराया शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन के चेयर कार में 100 किलोमीटर का न्यूनतम बेसिक किराया जहां 215 रुपए है, वहीं वंदे भारत ट्रेन में इस दूरी का बेसिक किराया 301 रुपए रखा गया है। जबकि इसी दूरी के लिए एग्जीक्यूटिव क्लास में शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन का बेसिक किराया 488 रुपए है, तो वंदे भारत ट्रेन के इसी क्लास का बेसिक किराया 634 रुपए है। यदि 500 किलोमीटर की दूरी के किराए की बात करें तो शताब्दी एक्सप्रेस के चेयर कार का न्यूनतम किराया 658 रुपए जबकि, वंदे भारत ट्रेन में यह किराया है 921 रुपए है। वहीं इस दूरी के लिए शताब्दी एक्सप्रेस के एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 1446 रुपए है, जबकि वंदे भारत ट्रेन के लिए यह किराया 1880 रुपए रखा गया है। वसूला जाता है ये चार्ज भी इतने किराए के बाद भी पैसेंजर्स को रिजर्वेशन चार्ज, सुपरफास्ट चार्ज, जरूरत के मुताबिक खान-पान का चार्ज और जीएसटी भी चुकाना होता है। यह हालत तब है, जब रेलवे का दावा होता है कि वह पैसेंजर्स को करीब 45 फीसदी की रियायत पर रेल यात्रा करवाता है। यानी इतना महंगा किराया कि यदि एक परिवार को सफर करना हो तो यदि वह कार से जाए, तो वंदे भारत के मुकाबले सस्ता पड़ेगा।
Updated on:
13 Jul 2023 05:25 pm
Published on:
13 Jul 2023 05:22 pm

बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
