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बड़ा तालाब को लील रहा वीआईपी कल्चर, दो साल से एक भी कब्जा नहीं हटा, सैटेलाइट सर्वे तक ही सिमटे

- वर्ष २०१९ में पहली बार राजस्व नक्शे में उतारी गई बड़ा तालाब की सीमा, सैटेलाइट सर्वे कर चिन्हित की थीं गायब मुनारें भोपाल. राजधानी को खूबसूरती का तमगा दिलाने वाले बड़ा तालाब को शहर का वीआईपी कल्चर ही लील रहा है। खानूगांव, बोरवन, बहेटा, संजय नगर, भैंसाखेड़ी, लाउखेड़ी में ५० मीटर दायरे त

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बड़ा तालाब को लील रहा वीआईपी कल्चर, दो साल से एक भी कब्जा नहीं हटा, सैटेलाइट सर्वे तक ही सिमटे

- ३५४ वर्ग किमी में फैले तलाब के सीने पर आमोद प्रमोद के नाम पर हुए अवैध कब्जे, कुछ टूटे, बाकी पर वीआईपी कल्चर हावी


भोपाल. राजधानी को खूबसूरती का तमगा दिलाने वाले बड़ा तालाब को शहर का वीआईपी कल्चर ही लील रहा है। खानूगांव, बोरवन, बहेटा, संजय नगर, भैंसाखेड़ी, लाउखेड़ी में ५० मीटर दायरे तक में अतिक्रमण चिन्हित हैं। इनमें कहीं न कहीं वीआईपी लोगों के फॉर्म हाउस या उनसे जुड़े लोगों के कब्जे हैं। यही वजह है कि नगर निगम और प्रशासन मिलकर इन कब्जों को हटा नहीं पा रहा। वर्ष २०१९ में ही बड़े तालाब को लेकर प्रशासन ने संयुक्त सर्वे कराया था। पहली बार तालाब की सीमा को राजस्व नक्शे में तय किया गया। इसमें एफटीएल के अंदर २२७ अवैध निर्माण और इसके बाहर कैचमेंट में ही करीेब ९४ अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे। करीब ३२१ अवैध निर्माणों को प्रशासन की टीम ने चिन्हित किया था। इसमें से १९ पर ही कार्रवाई हो सकी थी। इसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार में ही एक मंत्री के विरोध में आने पर कार्रवाई को रोक दिया। इसके बाद से अभी तक एक अतिक्रमण नहीं हटा। जो जिस स्थिति में काबिज है, उससे कहीं और ज्यादा लोगों ने कब्जे करने की कोशिश की। पिछले वर्ष ही खानूगांव की तरफ बड़ा तालाब में कॉलोनी काटने का बोर्ड लगाया था। जो बरसात में डूबा तब कहीं जाकर तालाब में अवैध घुसपैठ की पोल खुली। इस पर भी जिम्मेदारों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

जिला प्रशासन की तरफ से किया गया सैटेलाइट सर्वे करीब एक माह के आस-पास चला था जिसमें सैटेलाइट की मदद से पुरानी मुरानों की लोकेशन तलाशी गईं थीं। ९४६ मुनारें तालाब के किनारे लगाईं गईं थीं, जिसमें से ३०० से ज्यादा गायब मिली थीं। मुनार संख्या एक से लेकर १७ तक चिरायु अस्पताल के अंदर से गायब थीं। भैंसाखेड़ी के पास मुनार नंबर १८ से गिनती शुरू की गई। सैटेलाइट इमेज की मदद से ये सर्वे पूरा किया गया। रिपोर्ट बनी, कागजों में दफन हो गई।

इतने कब्जे इन क्षेत्रों में मिले थे

खानूगांव में--४६ कब्जे

हलालपुर से बोरवन (बूड़ाखेड़ा )--१२१

बहेटा में ओल्ड डेरी फार्म--७२

राहुल नगर में--४१

संजय नगर में गोदाम और झुग्गी--२०

व्हीलखेड़ा, बम्हौरी, सेवनिया गौड, गौरा में-२१

वीआईपी के कब्जे, आम आदमी के नाम पर दर्ज?

खानूगांव में पचास मीटर दायरे में फार्म हाउस, बाउंड्रीवाल बनाई गईं हैं, यहां सलीम अख्तर, अब्दुल हफीज खान, नरगिस, , वैद्यनाथ, विकास त्रिपाठी, माजिद अब्बासी, मुमताज अनवर, पानी फैक्टरी, साबिर अली सहित कई अन्य लोगों के कब्जे मिले हैं। हलालपुरा में पूजा विशनदास का पटाखा गोदाम, शफीक खान का फिजा फार्म हाउस, एक क्लब और एक बाउंड्रीवॉल है। इन लोगों ने पहले तालाब के किनारों को मिट्टी से पूर दिया। इसके बाद पिलर खड़े करके मकान बना लिए। इन लोगों को कहीं न कहीं वीआईपी या रसूखदार लोगों का संरक्षण है या उनके ही कब्जे हैं जो इन लोगों के नाम पर दर्ज हैं।

वर्जन

बड़ा तालाब में अवैध कब्जों के संबंध में अधिकारियों से जानकारी की जाएगी। पूर्व में कितने तय किए गए और कितनों पर कार्रवाई हुई। वर्तमान स्थिति पता कर आगामी कदम उठाए जाएंगे।

कवींद्र कियावत, संभागायुक्त