
राजधानी में 25 साल में आधी रह गई विदेशी परिंदों की संख्या
भोपाल। कैनवास पर बनी पेंटिंग्स तो बहुत लोग देखते हैं, पर चावल के दाने पर बनी आर्ट और अनूठी पेंटिंग्स आपको अचंभित कर सकती हैं। कुछ ऐसी ही पेंटिंग्स देखने को मिली सोमवार को स्वराज कला वीथि में। यहां 'वा मां' नाम से इंटरनेशनल ग्रुप की पेंटिंग्स, फोटोग्राफी और स्कल्पचर एग्जीबिशन की शुरुआत हुई है। दीप वाजपेयी की याद में आयोजित की जा रही यह एग्जीबिशन मेंस डे पर केंद्रित है। यहां देश के कोने-कोने से आए आर्टिस्ट्स ने अपनी आर्ट को डिस्प्ले किया है।
आयोजक आर्टिस्ट नीता दीप वाजपेयी ने बताया कि इस एग्जीबिशन को मैंने अपने हसबैंड की याद के तौर पर आयोजित किया है। वे कहती हैं कि हम वुमंस को सपोर्ट करने के लिए वुमंस डे मनाते हैं, लेकिन मेंस के लिए कोई दिन नहीं होता। हर वुमंस को आगे बढ़ाने के लिए पुरुषों का अहम योगदान होता है। इसलिए यह एग्जीबिशन पुरुषों को समर्पित कर रखी गई है। इसके लिए मैंने ऑनलाइन एंट्री मांगी थी, जिसमें सिर्फ मेंस को ही शामिल किया है। यहां इंडिया और बांग्लादेश के कुल 17 आर्टिस्ट्स की पेंटिंग एग्जीबिट की गई हैं जिसका आयोजन 23 मई तक किया जाएगा।
बेटे ने तैयार की मां की आशा
वहीं आर्टिस्ट नीता दीप के 14 साल के बेटे दीपांश वाजपेयी के फोटोज भी एग्जीबिशन में शामिल हैं जिसमें उन्होंने मां के हाथ में सूरज के फोटोज को क्लिक किया है, जो उनकी बेस्ट फोटोग्राफी भी है। इसके अलावा यहां अन्य आर्टिस्ट ने नेचर, वुमन ब्यूटी आदि पर अपने आर्ट एग्जीबिट किए हैं।
ये आर्टिस्ट हैं शामिल
इस एग्जीबिशन में अनिल निशाकर, दिपांश वाजपेयी, कमल कुशलानी, रित्विक बैरागी, हुजैफा जफर, करन सिंह, राकेश सोनी, राज सैनी (सभी भोपाल), बीमान नाग (कोलकाता), इस्तेयाक अहमद (पटना), जेशू नाग (नई दिल्ली), खलीफा पलाश (ढाका), मुधकर राज (नई दिल्ली), मोनीष श्रीवास्तव (इंदौर), मधुसुदन साहा (नई दिल्ली), प्रकाश बेटावर (नागपुर), स्पंदन आनंद दुबे (छिंदवाड़ा)।
मेडिसिन क्वाइल से बनाए स्कल्पचर
पश्चिम बंगाल के आर्टिस्ट बीमान नाग के आर्ट को भी एग्जीबिट किया है। वे दुनिया में मेडिसिन के क्वाइल्स से स्कल्पचर बनाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी आर्ट में महात्मा गांधी, मां-बेटे, गणेश भगवान, चीता आदि के स्कल्पचर शामिल हैं।
भारत-बांग्लादेश के समझौते को भी पेंटिंग में उकेरा
यहां बांग्लादेश के आर्टिस्ट पलाश खलीफा की सबसे छोटी पेंटिंग्स भी एग्जीबिट की गई हैं। इसकी खास बात है कि यह उन्होंने कैनवास पर नहीं बल्कि चावल के दाने पर बनाई है। इसे देखने के लिए भी लेंस का इस्तेमाल करना पड़ता है। ढाका के रहने वाले खलीफा दुनिया में सबसे छोटी पेंटिंग्स बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं। एग्जीबिशन में उनकी बांग्लादेश के उद्भव की 1971 की पेंटिंग्स को भी शामिल किया है जिसमें भारत-बांग्लादेश समझौता को पेंटिंग में उकेरा है।
Published on:
22 May 2018 06:31 pm

बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
