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सिर पर राजपूताना पगड़ी धारण कर दिया विरासत के संस्कारों को आत्मसात करने का संदेश

- साफा, पगड़ी बांधने का दिया प्रशिक्षण दिया, बताया पगड़ी का महत्व भोपालराजपूतों में पगड़ी का विशेष महत्व है। पगड़ी राजपूतों के गौरव और सम्मान का प्रतीक है, लेकिन बदलते समय के साथ लोग इससे दूर हो रहे हैं। लोग पगड़ी का महत्व समझे और इसे फिर आत्मसात करे, इस उद्देश्य से राजपूत महापंचायत की ओर से तुलसी नगर स्थित थियोसोफिकल स्कूल में साफा, पगड़ी बांधने का प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

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सिर पर राजपूताना पगड़ी धारण कर दिया विरासत के संस्कारों को आत्मसात करने का संदेश

सिर पर राजपूताना पगड़ी धारण कर दिया विरासत के संस्कारों को आत्मसात करने का संदेश

इस प्रशिक्षण और प्रतियोगिता में अनेक लोगों ने राजपूताना अंदाज में पगड़ी बांधी। इस दौरान पगड़ी के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण का आयोजन राजपूती वेशभूषा एवं संस्कार कार्यक्रम के तहत किया गया। महापंचायत के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि महापंचायत का मूल कार्य राजपूतों में संस्कारों से राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव पैदा करना है। यह तभी संभव है जब राजपूत अपनी विरासत के संस्कारों को अपने जीवन में आत्मसात कर लें। इस अवसर पर उन्होंने राजपूतों में प्रचलित अनेक प्रकार की पगडिय़ों को बांध कर दिखया एवं सभी प्रकार की पगडिय़ों के बारे में बताया कि किस प्रकार की पगड़ी किस अवसर पर धारण की जाती है। इस मौके पर महापंचायत के विजय सिंह, सचिन सिंह बघेल आदि ने भी पगड़ी के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रतियोगिता का भी हुआ आयोजन
इस मौके पर पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें समाज के अनेक लोगों ने भाग लिया और पगड़ी धारण की। इस प्रतियोगिता में अमर सिंह तोमर को प्रथम, जितेंद्र सिंह चौहान को द्वितीय एवं संतोष सिंह तोमर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इस मौके पर अनेक लोग उपस्थित थे।

आगे भी करते रहेंगे आयोजन
महापंचायत के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान दौर में हमारी विरासत बचाना बहुत आवश्यक है, साथ ही युवा पीढ़ी को भी इससे जोड़े रखना होगा। इसके लिए महापंचायत द्वारा लगातार पहल की जा रही है, ताकि समाज के लोग समाज की संस्कृति को अपनाए और समाजहित, राष्ट्रहित में अपना योगदान दे। इसके लिए इस तरह के आयोजन आगे भी करते रहेंगे।