
Digital arrest प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
रूपेश मिश्रा
MP News: साइबर अपराध की दुनिया में ठगी का पैटर्न अब बदल रहा है। बीते तीन सालों से डिजिटल अरेस्ट नाम का एक नया ठगी का पैटर्न सामने आया। जिसमें ठगों द्वारा पुलिस या सेना की वर्दी का इस्तेमाल कर और जांच एजेंसियों का रौब दिखाकर व्यक्ति को उसी के घर में अरेस्ट किया जाता है। और बाद में उससे मोटे पैसे ऐंठे जाते है।
इस गंभीर किस्म के साइबर अपराध पर अब सख्त निगरानी की तैयारी की गई है। राज्य साइबर सेल द्वारा यह तय किया गया है कि डिजिटल अरेस्ट का हर प्रकरण अब सीधे राज्य साइबर सेल द्वारा इन्वेस्टिगेट किया जाएगा, फिर चाहे वह किसी भी जिले का प्रकरण हो। इसको लेकर स्टेट साइबर सेल में बकायदा 6 एक्सपर्ट लोगों का एक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) गठित की गई है। जो एक-एक प्रकरण के मोडस ऑपरेंडी पर काम करेगी।
डिजिटल अरेस्ट में ठग ऑडियो या वीडियो कॉल के जरिए पुलिस, सीबीआइ, ईडी, कस्टम या अन्य अफसर बनकर लोगों को अपने दांव में फंसाते हैं। झूठे मामले का हवाला देकर उनके झांसे में आने वालों के खाते खाली कर दिए जाते हैं। जागरूकता की कमी में ऐसी वारदातें हो रही हैं, जबकि पुलिस या कोई भी सरकारी विभाग में गिरफ्तारी की डिजिटल प्रक्रिया नहीं है।
राज्य साइबर सेल ने दिसंबर में दिल्ली की तर्ज पर ई-जीरो एफआइआर की शुरुआत की। इसमें अब ऑनलाइन दर्ज होने वाली शिकायतों को जिलों में भेजने के बजाय राज्य साइबर सेल भेजा जाएगा। जहां से सीधे इन्वेस्टिगेट किया जाएगा। इसके पीछे का उद्देश्य यह है कि गंभीर किस्म के इस अपराध की पड़ताल दक्ष टेक्निकल टीम और एक्सपर्ट से कराना है। ताकि मामले में सटीक जांच हो और पीड़ितों को इसका लाभ मिल सके
डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे है। यह गंभीर किस्म का अपराध है और इसमें तत्काल एक्शन लेने की जरूरत होती है। इसलिए ऐसे प्रकरणों को राज्य साइबर सेल द्वारा इन्वेस्टिगेट किया जा रहा है। इसको लेकर एक ऑपरेशन ग्रुप भी बनाया गया है। - प्रणय नागवंशी, एसपी, राज्य साइबर सेल
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Published on:
08 Feb 2026 02:16 pm
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