1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दीपावली से एक दिन पहले है ‘हनुमान जयंती’, इस दिन जरूर चढ़ाएं सिंदूर का चोला

diwali muhurat- दीपावली पर भी हनुमान जयंती मनाई जाती है, इस दिन भगवान बजरंगबली को चोला चढ़ाने का महत्व है, यह है कारण...।

3 min read
Google source verification

भोपाल

image

Manish Geete

Oct 25, 2019

01_3.png

भोपाल। भगवान श्रीराम के परमभक्त हनुमान जी को दिवाली ( diwali ) से एक दिन पहले रूप चौदस के दिन अमर होने का वरदान मिला था। यह वरदान सीता माता ने दिया था। इसी दिन से हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़ाने की परंपरा है। आइए जानते हैं श्रीराम के प्रति परम भक्ति के कारण सीता माता इतनी प्रसन्न हो गई कि उन्हें अमर होने का वरदान दे दिया था। तभी से आज तक हनुमानजी को अजर-अमर माना जाता है। यह भी माना जाता है कि जब भी किसी के घर सुंदरकांड का पाठ किया जाता है तो वे अदृश्य रूप में विराजमान हो जाते हैं।

कम ही लोग जानते हैं कि हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। एक-एक बार चैत्र मास में और एक बार कार्तिक मास में इसका काफी अहम कारण भी है। दोनों ही जयंती पर चोला चढ़ाने का भी महत्व है। इस दिन हनुमानजी की पूजा करने से बिगड़े काम बन जाते हैं और कृपा बरसने लगती है। इस दिन हनुमान जी का पूजन करने से श्रद्धालु हर जगह विजय पाता है। बजरंग बली को भोलेनाथ का अवतार माना जाता है। वे अनंत सूर्य से भी तेज प्रकृति के स्वामी हैं। मान्यताओं के मुताबिक जहां भी सुंदरकांड का पाठ विधि-विधान से किया जाता है, वहां हनुमानजी अदृश्य रूप में मौजूद रहते हैं। वे भक्तों की परेशानियां दूर कर देते हैं।

क्या करें इस दिन
-कीर्तन, श्री अखण्ड रामायण का पाठ कराना चाहिए।
-हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस तरह सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी।
-भक्तों को कठिन व्रत, पूजन या अनुष्ठान, जबकि निःस्वार्थ प्रेम की आशा होती है। नरक चौदस के दिन और दीपावली के दिन भगवान का सच्चे प्रेम से स्मरण करें।
-पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा का षोडशोपचार अथवा पंचोपचार से पूजन करें।
-इस दिन भगवान को चोला चढ़ाने से वे बेहद प्रसन्न होते हैं।
-महिलाएं भी अक्षय पुण्य के लिए भगवान की आराधना करती हैं।
-विद्यार्थियों को विद्या की प्राप्ति भी होती है। उनका पढ़ाई में मन लगता है।
-जिनकी कुंडली में मंगल दोष, शनि दोष राहु-केतू, सूर्य दोष आदि हों तो उन्हें भी इस दिन बजरंगबली की आराधना करना चाहिए।

IMAGE CREDIT: NET

इसलिए चढ़ाते हैं सिंदूर
भोपाल के पंडित जगदीश शर्मा के मुताबिक कथा में इन प्रसंगों का उल्लेख है कि जब श्रीलंका से विजयी होकर रामसेना अयोध्या पहुंच गए थे। उत्सव की तैयारी थी, तभी सीता माता हनुमान की भक्ति से बेहद प्रसन्न थी, तो उन्हें उपहार देना चाहती थी। हनुमानजी कुछ भी उपहार नहीं लेना चाहते थे। इस पर हनुमानजी से अपनी मनपसंद चीज मांगने का आग्रह किया। इस पर हनुमानजी ने सीतामाता से कहा कि आपकी सबसे प्रिय चीज क्या है। इस पर सीता माता ने कहा कि मेरी सबसे प्रिय चीज ये सिंदूर है। सीतामाता उस समय श्रृंगार करते हुए अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थीं। तभी हनुमानजी ने जिज्ञासावश पूछ लिया कि इससे क्या होता है। इस पर सीता माता ने जवाब दिया था कि इससे मेरे स्वामी श्रीरामजी की आयु और सौभाग्य बढ़ जाता है। यह सुनकर हनुमानजी बेहद उत्साहित हो गए और उन्होंने सोचा कि एक चुटकीभर सिंदूर से जब मेरे भगवान की आयु और सौभाग्य बढ़ जाता है तो क्यों न मैं पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लूं, जिससे मेरे भगवान श्रीराम हमेशा-हमेशा के लिए अमर जो जाएंगे और उनकी कृपा मुझ पर हमेशा बनी रहे। इसके बाद हनुमानजी गए और पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। यह नजारा देख सीतामाता भी भाव विभोर हो उठी।

सीता माता ने दिया अमर होने का वरदान
सीता माता हनुमान की सच्ची श्रद्धा देख इतनी प्रसन्न हो गई कि उन्होंने हनुमानजी को अमर रहने का वरदान दिया था। तभी से दीपावली पर भी हनुमान जयंती का दिन माना जाता है। उन्हें अमर होने का वरदान इसी दिन मिला था।

Story Loader