
भोपाल@देवेंद्र शर्मा
जिस वार्ड पार्षदी की टिकट के लिए लोग राजनीतिक दलों में लॉबिंग और टिकट मिलने के बाद अब जमकर प्रचार कर रहे हैं, वास्तव में सरकारी स्तर पर उसके लिए कुछ खास मानदेय व विकास राशि नहीं मिलती है। भोपाल निगम के पार्षदों को वेतन के तौर पर प्रतिमाह 6000 रुपए और निगम से एक मोबाइल सिम मिलती है। पार्षद के पास विकास के लिए कोई विशेष निधि भी नहीं होती। वार्डवासी जो संपत्तिकर जमा करते हैं, उसका 50 फीसदी विकास पर खर्च होता है।
बैठक में शामिल होने पर रु.250 का भत्ता
नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत बैठकों में शामिल होने वाले पार्षदों को 250 रुपए का भत्ता देने का प्रावधान है। पूरे साल में पार्षद इससे बमुश्किल चार से पांच हजार रुपए ले पाते होंगे। साल में नगर निगम परिषद की औसत पांच बैठक और 15 से 20 बैठक जोन समिति की होती है। पार्षद 20 बैठकों में भी भाग लेता है तो उसे प्रति बैठक 250 रुपए के अनुसार पांच हजार रुपए इससे मिल पाते हैं।
दूसरों के भरोसे विकास के दावे
पार्षद प्रत्याशी प्रचार में अभी जो विकास के वादेकर रहे हैं, वास्तव में वे दूसरों के ही भरोसे हैं। पार्षद के पास विकास के लिए कोई निधि नहीं होती। जिस वार्ड में जितना अधिक संपत्तिकर जमा होता है, उतनी ही निधि विकास के लिए निकाली जा सकती है।
निगम अध्यक्ष को 11 हजार तो महापौर को 13 हजार रुपए वेतन: नगर पालिक अधिनियम में निगम परिषद अध्यक्ष को वेतन के लिए 11 हजार रुपए की राशि तय की है, जबकि महापौर के लिए 13 हजार रुपए प्रतिमाह का वेतन तय है। इसके अतिरिक्त आवास, वाहन व कार्यालय-कर्मचारी की सुविधा मिलती है।
पार्षद को न कोई अच्छा मानदेय है न ही विकास की निधि। मोबाइल सिम दी जाती है। बाद में कोई पेंशन या सुविधा भी नहीं है।
- महेश मकवाना, पूर्व एमआईसी नगर निगम
पार्षदों के भी वेतन भत्ते बढ़ाना चाहिए। जनता से संपर्क में रहने के लिए कम से कम निगम को मोबाइल तो देना ही चाहिए।
- सुरजीत सिंह चौहान, पूर्व नगर निगम परिषद अध्यक्ष
Published on:
25 Jun 2022 09:56 am
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