
भोपाल. शादी के बाद एक युवती अपने प्रेमी से व्हाट्सएप पर लगातार चैट कर रही थी। एक रात पति ने उसे चैट करते हुए पकड़ लिया, दोनों में बहस हुई जमकर झगड़ा हुआ। पत्नी ने साफ कह दिया कि वह न तो प्रेमी को छोड़ेगी और न उसे। पति कई दिनों तक मानसिक तनाव से गुजरा, इसके बाद मामला कुटुंब न्यायालय में पहुंचा है। ऐसे ही एक अन्य मामले में पति वॉशिंग मशीन खराब होने पर नई नहीं दिला पाया तो पत्नी ने घर में खाना बनाने से लेकर कपड़े धोने तक के काम से स्ट्राइक कर दी। बच्चों तक को स्कूल के लिए तैयार नहीं कर रही, परेशान पति फैमिली कोर्ट पहुंचा है। ऐसे एक नहीं कई मामले हैं जो छोटी-छाेटी बातों से शुरू होकर आपसी ईगो में इतने बड़े हो जाते हैं कि उनमें परिवारों के टूटने की नौबत आ जाती है।
जानकारों की मानें तो ऐसे केसों की संख्या अब बढ़ने लगी है। छोटी-छोटी बातें जैसे एक महिला को कुत्ते पालने का शौक था, लेकिन पति को कुत्तों की बदबू से सख्त नफरत थी। ऐसा ही मामला पूर्व में कुटुम्ब न्यायालय में पहुंचा था। किसी तरह पति पत्नी के बीच समझौता हुआ।
ये शिकायतें तो आवेदन में हो गईं कॉमन
- पत्नी सब्जी में नमक कम डालती है, इसे रोटी बनाना नहीं आता, दाल में तड़का नहीं लगा पाती- पति खर्चे के लिए कम रुपए देता है, इससे पत्नी अपनी जरूरत का सामान नहीं खरीद पाती
- पत्नी लेट साेकर उठती है, सास को उसका देर से उठना पसंद नहीं है, चाय नाश्ता देर से बनाती है- पत्नी फोन नहीं छोड़ती, नहाते समय भी अपने साथ ले जाती है, ऐसा क्या है फोन में, जो वह छिपाती है
- पति शराब बहुत पीते हैं, कई बार समझाने के बाद भी नहीं मानते, अब आप ही उन्हें बुलाकर समझाएं
सुसर से परेशान एक बहू, पति भी नहीं कर रहा मददहाल ही में कुटुंब न्यायालय में एक ऐसा केस भी आया है जिसमें ससुर बेटे की बहू से संबंध बनाना चाहता है। महिला मना कर चुकी है, पति को भी बात बताई तो वह भी चुप रहा। कोई महिला की मदद करने तैयार नहीं है, मजबूरी में महिला ने घर ही छोड़ दिया। ऐसे ही अवैध संबंधों के कई मामले कोर्ट में आते हैं, जिनमें पत्नी को पति के अवैध संबंधों पर शक रहता है, इस कारण वह उन पर ध्यान नहीं देते।
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पति पत्नी विवाद के रोजाना केस आते हैं, कई बार तो हम लोग भी हैरान हो जाते हैं। समझाइश देते हैं, कुछ में लोग मान जाते हैं, तो कुछ केस लंबे चलते हैं।अमिता अवस्थी, एडवोकेट
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आजकल छोटी-छोटी बातों पर लोग कुटुंब न्यायालय आते हैं, मेरा कहना है कि आपस में थोड़ा सामंजस्य बनाएं। एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश करें तो विवाद नहीं बढ़ेंगे।अरविंद रघुवंशी, प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय
Published on:
27 Nov 2023 09:28 pm
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