- ऐसे छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर तलाक तक की नौबत, घर छोड़कर मायके चली जाती हैं कई नव विवाहित, कुटुंब न्यायालय में उनको दी जा रही समझाइश
भोपाल. पत्नी को कुत्तों लगाव है तो उसने घर में कई सारे कुत्ते पाल लिए, अब बदबू से पति परेशान हो गया। कोई नव विवाहित सुबह दस बजे तक सोना चाहती है, लेकिन उसकी सास को आपत्ति है। कोई देर रात तक गाना सुनना चाहती है, लेकिन पति सोना चाहता है। आर्मी मेन अपनी पत्नी को सौ रुपए की जगह बीस रुपए खर्च के लिए देता है। ऐसे छोटे-छोटे मामलों को लेकर कुटुंब न्यायालय में रोजाना 5 से 8 मामले तलाक के पहुंच रहे हैं। इनमें कई मामले काउंसलर के द्वारा समझा दिए जाते हैं तो कई सेटलमेंट के बाद ही सुलझ रहे हैं। राजधानी में चार कोर्ट हैं, ऐसे में 30 से 35 मामले आना रोज की बात है।
केस-1, पत्नी ने पाले कुत्ते, पति को पसंद नहींशहर में ही एक कॉलोनी में रहने वाली महिला को बचपन से कुत्तों से लगाव है। उसने शादी के बाद भी घर मे कुत्ते पाल रखे हैं, धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई तो वे हर कमरे में घुसने लगे। पति इन कुत्तों की धमाचौकड़ी और बदबू से इतना परेशान हो गया कि उसने कुटुंब न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन कर दिया।
केस-2, देर तक सोने की आदत है
नव विवाहित को देर तक सोने की आदत है। वह अक्सर सुबह दस बजे सोकर उठती है। लेकिन उसकी सास को बहू की ये आदत पसंद नहीं है। सास ने टोका तो घर में झगड़े बढ़ने लगे। पति भी पत्नी और मां के झगड़े से तंग हो गया। एक दिन नौबत ये बन गई कि झगड़े के बाद पत्नी अपने मायके चली गई और मामला कोर्ट में पहुुंच गया।
केस-3, डेढ़ साल बाद आया पति, खर्च नहीं करने देता रुपएसेना में पदस्थ एक जवान डेढ़ साल बाद अपने घर लौटा, उसकी पत्नी से उससे घर या अन्य खर्चों को लेकर बात की तो उसने सौ रुपए पत्नी की तरफ से मांगे गए रुपयों की जगह पांच गुना कम रुपए दिए। इस बात पर पत्नी नाराज हो गई और छोटी बेटी को लेकर कमरे में चली गई। पति पत्नी में बातचीत बंद हो गई। कई बार समझाने पर बात नहीं बनी तो मामला कोर्ट में पहुंच गया।
ऐसे केस आते हैं ज्यादातर
धारा- 13, तलाक के प्रकरणधारा-125----मेंटेनेंस का केस, इसमेें फैसले के बाद पति पत्नी को तय भत्ता देता है।
धारा-125-3, ऑर्डर के बाद भी पति रुपए नहीं देता तो इस धारा में वसूली के लिए केस।धारा-127- जो रुपए तय किए वे कम हैं, ऐसे में उनको बढ़वाने के लिए।
धारा-7, नियम-11, बच्चों को साथ रखने के संबंध में।धारा-9, साथ में रखने के लिए।
वर्जन
हमारे पास रोजाना कई केस आते हैं। लेकिन इन दिनों ऐसे केस ज्यादा आ रहे हैं जिनमें छोटी-छोटी बातों को लेकर मामले कोर्ट में पहुंच रहे हैं। ऐसे केसों में हम पति पत्नी की काउंसलिंग करते हैं, 50 फीसदी केस काउंसलिंग में हल हो जाते हैं।अमिता अवस्थी, एडवोकेट
वर्जन
102 साल की बुजुर्ग महिला ने मांगा भरण पोषणहमारे यहां हाल ही में एक 102 साल की महिला ने भरण पोषण के तहत आवेदन किया है। मां अभी अपनी बेटी के पास रहती है। उसके तीन बेटे हैं। इसके अलावा कई छोटे-छोटे मामलों में लोग कोर्ट आ रहे हैं। उनको समझाइश और काउंसलिंग दी जाती है।
अरविंद रघुवंशी, प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय