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महिला या पुरुष… डिप्रेशन का शिकार सबसे ज्यादा कौन? चौंकाने वाली रिपोर्ट

Depression: 18 से 45 साल की महिलाओं में पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा डिप्रेशन है। सिर्फ एक माह के ही आंकड़ों से डॉक्टर भी हैरान हैं। जून में मानसिक रोग विभाग में पहुंचे 400 मरीजों में हर दूसरी मरीज युवती थी। रिपोर्ट के अनुसार 25 साल की उम्र आते-आते लड़कियों में डिप्रेशन और एंग्जायटी का ग्राफ लड़कों से कहीं ज्यादा बढ़ रहा है।

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Depression

Depression (फोटो सोर्स : एआई जेनरेटेड)

Depression: चेहरे पर हंसी और सोशल मीडिया पर जिंदगी परफैक्ट…लेकिन रात होते ही सिर में भारीपन लगता है। यह तनाव युवाओं को तोड़ रहा है। मोबाइल और डिजिटल हो रही लाइफस्टाइल में युवाओं की चुप्पी बढ़ रही है और इसमें सबसे ज्यादा लड़कियां और महिलाएं टूट रही हैं। खंडवा मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की ताजा रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट बताती है, मानसिक बीमारियां सिर्फ मेडिकल इश्यू नहीं, सामाजिक चिंता का कारण है।

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डिप्रेशन और एंग्जायटी का ग्राफ लड़कों से कहीं ज्यादा

18 से 45 साल की महिलाओं में पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा डिप्रेशन है। सिर्फ एक माह के ही आंकड़ों से डॉक्टर भी हैरान हैं। जून में मानसिक रोग विभाग में पहुंचे 400 मरीजों में हर दूसरी मरीज युवती थी। रिपोर्ट के अनुसार 25 साल की उम्र आते-आते लड़कियों में डिप्रेशन(Depression) और एंग्जायटी का ग्राफ लड़कों से कहीं ज्यादा बढ़ रहा है।

400 में 26% महिलाएं डिप्रेस्ड

जून में मानसिक रोग विभाग में आए 400 मरीजों में 152 डिप्रेशन, एंग्जायटी, सायकोसिस, नशे से जुड़ी समस्याएं मिलीं। डिप्रेशन ग्रस्त पुरुषों का प्रतिशत 9 तो महिलाओं का २६त्न मिला। सायकोसिस पीड़ित महिलाएं 3त्न अधिक रही। हालांकि नशे की आदत 8% पुरुषों में, 0.67% महिलाओं में मिली। 25 साल तक की 35% लड़कियां व 30% लड़के प्रभावित थे। हालांकि बुजुर्गों में यह सिर्फ 8% रहा।

ये तीन कारण, जिससे बढ़ रहा मर्ज

  1. घर में संवाद कम: डिजिटल युग में बाहरी दुनिया से जुड़ाव बढ़ा। घर में संवाद कम हो गए। महिलाएं (Lifestyle and Relationship)मन की बातें परिवार से नहीं कह पा रहीं। ऊपर से काम का बोझ। इससे मानसिक थकान।
  2. बीमारी नहीं मानतीं: कई महिलाएं बीमारी को मानसिक समस्या मानने को तैयार नहीं होतीं। वे इसे थकान या ‘कमजोरी’ समझती हैं। दवा लेने से हिचकती हैं। ऐसे में समय पर इलाज नहीं मिलता।
  3. मोबाइल की लत: मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय इंगले कहते हैं, डिप्रेशन-एंग्जायटी के कारणों में मोबाइल की लत, निगेटिव सोच से जुड़ी रील्स, असंतुलित जीवनशैली है।

ऐसे मामले पहले ही आ चुके सामने

जनवरी 2023: भोपाल के ट्रांसपोर्ट नगर में वर्षा लोधी ने खुदकुशी कर ली। वह एमएड थी, नौकरी ढूंढ़ रही थी। वह अवसाद में थी।

मार्च 2024: ग्वालियर में मोबाइल के लत से महिला का घर टूटा। पति ने दूसरी शादी कर ली।

2025: इंदौर में पत्नी ने तनाव में की आत्महत्या, पति ज्यादातर मोबाइल का इस्तेमाल करता था। पत्नी से उसकी बातें भी घर में बेहद कम हो गई थी।

ऐसा करें

  • सोने से पहले मोबाइल न चलाएं।
  • रील्स या नेगेटिव कंटेंट न देखें।
  • सोने से पहले किताब पढ़ें या संगीत सुनें।