
भोपाल . इंदौर संसदीय सीट से एक बार फिर से भाजपा सुमित्रा महाजन को अपना उम्मीदवार बना सकती है। सुमित्रा महाजन लगातार आठ बार लोक भा पहुंचने वाली देश की पहली महिला नेता हैं। मध्यप्रदेश की सियासत में कई महिलाओं को दबदबा रहा है। देश की अधिकतर राजनीतिक पार्टियां महिलाओं के लिए संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन का दावा करती हैं। लेकिन मध्यप्रदेश में इन दावों की सच्चाई को देखा जाए तो हकीकत कुछ और ही है।
मध्यप्रदेश की वो महिला नेता जिनका सियासत में दबदबा रहा
विजयाराजे सिंधिया: ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयराजे सिंधिया देश के पहले प्रधानमंत्री पंड़ित जवाहर लाल नेहरू के कहने के बाद सियासत के मैदान में उतरीं थी। राजमाता सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा था और सांसद बनीं थी। हालांकि वो ज्यादा दिनों तक कांग्रेस में नहीं रही। कांग्रेस छोड़ने के बाद राजमाता सिंधिया जनसंघ में शामिल हुई और फिर भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य रहीं। राजमाता सिंधिया आठ बार सांसद रहीं। उन्होंने छह बार गुना-शिवपुरी संसदीय सीट का नेतृत्व किया तो एक बार भिंड और एक बार ग्वालियर संसदीय सीट से सांसद रहीं। एक ऐसा दौर था जब मध्यप्रदेश की सियासत में राजमाता सिंधिया का दबदबा था। राजमाता सिंधिया के कहने पर उम्मीदवार तय होते थे और उनकी पर्जी से उम्मीदवार चुनाव जीत जाते थे। हालांकि राजमाता सिंधिया कभी मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री नहीं बनीं।
सुमित्रा महाजन: सुमित्रा महाजन 1989 में पहली बार इंदौर लोकसभा सीट से सांसद बनीं उसके बाद से यहां से वो लगातार सांसद निर्वाचित हो रही है। सुमित्रा महाजन लगातार आठ बार लोकसभा चुनाव जीत चुकीं हैं। देश की एकलौती महिला नेता हैं जो लगातार आठ बार सांसद निर्वाचित हुई हैं। मोदी सरकार में वो लोकसभा अध्यक्ष हैं। लोकसभा अध्यक्ष बनने वाली वो देश की दूसरी महिला नेता हैं। देश की पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष कांग्रेस नेता मीरा कुमार थीं। मध्यप्रदेश में सुमित्रा महाजन को ताई के नाम से जाना जाता है। सुमित्रा महाजन अभी तक एक बार भी लोकसभा सभा का चुनाव नहीं हारी हैं।
उमा भारती: भाजपा में उमा भारती के आने के कारण राजमाता विजयाराजे सिंधिया थीं। विजयाराजे सिंधिया के कहने के बाद ही उमा भारती सियासत में आईं थी और खजुराहो लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। 1984 में खजुराहो लोकसभा सीट से उमा भारती अपना पहला चुनाव हार गईं थी। उन्हें कांग्रेस की विद्यावती चतुर्वेदी ने चुनाव हराया था। उसके बाद 1989 से उमा भारती लगातार चार बार खजुराहो लोकसभा सीट से सांसद रहीं। 1999 में वो भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। यहां से भी वो चुनाव जीतीं। 2003 में उन्होंने प्रदेश की राजनीति की तरफ रूख किया और मध्यप्रदेश में 10 सालों बाद भाजपा की सरकार बनाई। उमा भारती मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने उत्तरप्रदेश की झांसी लोकसभा सीट से लड़ा और यहां से जीत दर्ज की। 2014 में वो मोदी कैबिनेट में मंत्री बनीं।
यशोधरा राजे सिंधिया: राजमाता विजयाराजे सिंधिया की दो बेटियां सियासत में हैं। यशोधरा राजे सिंधिया राजमाता विजयाराजे सिंधिया की सबसे छोटी बेटी हैं और मध्यप्रदेश की सियासत में सक्रिय हैं। यशोधरा राजे ग्वालियर संसदीय सीट से दो बार सांसद रहीं औऱ वर्तमान में शिवपुरी विधानसभा सीट से विधायक हैं। शिवराज सरकार में वो मंत्री भी रहीं। ग्वालियर चंबल की सियासत में यशोधरा राजे सिंधिया एक बड़ा नाम है।
जमुना देवी: जमुना देवी मध्यप्रदेश कांग्रेस की कद्दवार नेता थीं। वो मध्यप्रदेश की उपमुख्यमंत्री भी रहीं। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष । उन्हें 'सत्ता, सदन और संगठन' का लम्बा तजुर्बा हासिल था। प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले के सरदारपुर में 19 नवंबर 1929 को जन्मी जमुना देवी 1952 में तत्कालीन मध्य भारत विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुई थीं। 1962 में वह झाबुआ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं। 1978 में वो राज्यसभा सांसद रहीं। वर्ष 1985 में जमुना देवी आठवीं विधानसभा की सदस्य चुनी गयीं और उन्होंने प्रदेश मंत्रिमंडल में आदिम जाति और अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दायित्व संभाला। जमुना देवी कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार के दो उपमुख्यमंत्रियों में शामिल रहीं। वो कुछी विधानसभा सीट से लगातार छह बार विधायक रहीं। अर्जुन सिंह औऱ मोती लाल वोरा की सरकार में भी वो मंत्री रहीं।
देश की सियासत में महिलाएं
वहीं, अगर केन्द्र की बात करें तो सुमित्रा महाजन के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम आता है जो लगातार छह बार सांसद रहीं। अभी वो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और देश में उन्हें ममता दीदी के नाम से जाना जाता है। वहीं, राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बड़ी बेटी वसुंधरा राजे सिंधिया भी राजनीति का बड़ा नाम हैं। वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं और लोकसभा चुनाव भी जीता।
सुषमा स्वराज: केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज मध्यप्रदेश की विदिशा संसदीय सीट से 2014 में दूसरी बार सांसद निर्वाचित हुई हैं। इस बार उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है। सुषमा स्वराज वर्तमान में केन्द्र में विदेश मंत्री हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। उन्होंने छह राज्यों का प्रतिनिधितिव किया है।
Published on:
23 Mar 2019 09:48 am
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