
दिनेश कुमार स्वामी@बीकानेर. सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कृषि जिंस बेचने के लिए किसान को कई पेचीदगियों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में किसान लम्बे समय से एमएसपी पर सरकारी खरीद की जगह सरकार से बाजार भाव और एमएसपी के बीच के अंतर (मूल्य घाटा) का किसान को नगद भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। केन्द्र सरकार ने राजस्थान के लिए इस तरफ कदम बढ़ाया है।
सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान में कपास उत्पादक किसानों के लिए मूल्य घाटा भुगतान योजना (पीडीपीएस) का ड्राफ्ट जारी किया है। इस पर किसान संगठनों से सुझाव लेकर आगामी सीजन में लागू करने की तैयारी है।
कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया मुम्बई ने राजस्थान में प्रायोगिक आधार पर कपास के लिए मूल्य घाटा भुगतान योजना (पीडीपीएस) के लिए एसओपी जारी की है। इसके तहत राज्य सरकार भारत सरकार को योजना लागू करने वाले क्षेत्र की पहचान कर सूचना देगी। पायलट पीडीपीएस लागू होने के बाद, उस क्षेत्र में एमएसपी पर कपास की कोई भौतिक खरीद नहीं होगी। इसके लिए बाजार का दायरा कृषि उपज मंडी समिति यार्ड रहेगा। भावांतर का भुगतान रजिस्टर्ड व्यापारी को कपास बेचने पर ही किसान को मिलेगा।
पीडीपीएस योजना के तहत बेचे जाने वाले कपास का मॉडल मूल्य सप्ताह (सोमवार से शनिवार) के बीच रहे औसत मूल्य को माना जाएगा। इसकी घोषणा प्रत्येक सोमवार को की जाएगी। एमएसपी दर और मॉडल दर के बीच अधिकतम अंतर की सीमा 15% रहेगी। किसान को ऑनलाइन पोर्टल पर कपास विक्रय के लिए टोकन कटवाना होगा। भावांतर की राशि का भुगतान सीधा किसान के बैंक खाते में होगा। एक बार में एक किसान की 40 क्विंटल कपास ही इस योजना में कवर होगी। हालांकि किसान दोबारा-तिबारा और कपास भी बेच सकता है।
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शंभूसिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ बीकानेर
पीडीपीएस के तहत राजस्थान का चयन कर पायलट प्रोजेक्ट कॉटन पर लागू किया जा रहा है। इसमें सरकार 15 प्रतिशत भावांतर को कवर करने का प्रावधान कर रही है। जबकि यह सीमा नहीं होनी चाहिए। एमएसपी और बाजार में किसान की कपास जिस भी मूल्य पर विक्रय होती है, उसमें जो भी अंतर रहता है, उसे शत-प्रतिशत कवर करना चाहिए। साथ ही बीकानेर में मूंगफली का सर्वाधिक उत्पादन है। करोड़ों रुपए का खेल मूंगफली की सरकारी खरीद में हो रहा है। इससे छुटकारा दिलाने के लिए पीडीपीएस को कपास के साथ ही मूंगफली पर भी पायलट प्रोजेक्ट में शामिल करना चाहिए।
मुख्यालय से पीडीपीएस का ड्राफ्ट मिला है। इस पर किसान संगठनों से सुझाव मिले हैं। उन्हें सरकार को भेज रहे हैं। किसान के लिए यह बहुत अच्छी योजना है। इससे सरकार की किसान को एमएसपी का फायदा देने की मंशा पूरी होगी। पारदर्शिता आएगी और किसान का जोखिम भी कम होगा।
- उमेश शर्मा, सचिव कृषि उपज मंडी समिति बीकानेर
- 2600 से 3000 टन कपास सालाना उत्पादन प्रदेश में।
- 85 प्रतिशत श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ व बीकानेर जिले में।
- 15 प्रतिशत भीलवाड़ा, चित्तोड़गढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर व प्रतापगढ़ में।
- 7710 रुपए प्रति क्विंटल कपास के लिए एमएसपी खरीफ 2025-26 के लिए रही।
Published on:
26 Apr 2026 05:52 pm
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