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Rail Line Project: राजस्थान में यहां ​बिछेगी 320KM लंबी नई रेल लाइन, 3887 करोड़ की DPR तैयार; इन 3 जिलों को मिलेगा लाभ

Bikaner-Bathinda Railway Line Doubling: बीकानेर से बठिंडा के बीच रेल यात्रियों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बीकानेर-बठिंडा रेल लाइन दोहरीकरण की कवायत तेज हो गई है।

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Rail Line Project

Photo: Meta AI

बीकानेर। बीकानेर से बठिंडा के बीच रेल यात्रियों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 320 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक के दोहरीकरण की दिशा में अहम कदम बढ़ाते हुए फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) पूरा कर लिया गया है और डीपीआर रेलवे बोर्ड को स्वीकृति के लिए भेज दी गई है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू होने की संभावना है।

रेल लाइन के दोहरीकरण से ट्रेनों को सिग्नल के इंतजार में आउटर पर खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। इससे ट्रेनों की समयपालन में सुधार होगा और यात्रियों को राहत मिलेगी। डबल रेल ट्रैक होने के बाद इस रूट पर और भी सवारी और मालगाड़ियां चलाई जाएगी। ऐसे में राजस्थान से पंजाब के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और रेल यात्रियों का सफर आसान होगा

3887.88 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार

रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार बठिंडा-लालगढ़ खंड पर पर दोहरीकरण कार्य किया जाएगा। दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे भी हो गया है। बठिंडा से लालगढ़ (320 किमी) रेलवे लाइन के दोहरीकरण के कार्य के लिए एफएलएस सर्वे कर डीपीआर (लागत 3887.88 करोड़) तैयार कर रेलवे बोर्ड को स्वीकृति के लिए भेजी गई है।

रेलवे बोर्ड की ओर से डीपीआर स्वीकृति के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। इसके तहत बठिंडा-हनुमानगढ़-सूरतगढ़-लालगढ़ तक दोहरीकरण होना प्रस्तावित है। इसमें बठिंडा, सिरसा, मुक्तसर, हनुमानगढ़, सूरतगढ़ और बीकानेर जिलों के क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता हैं।

रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि लालगढ़ से बठिंडा तक 320 किमी रेलवे लाइन को दोहरीकरण का काम किया जा है। विशेष रेल परियोजना के तहत यह कार्य होगा। एफएलएस कर डीपीआर तैयार कर रेलवे बोर्ड को स्वीकृति के लिए भेजी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद जल्द काम शुरू हो सकेगा।

डबल रेल ट्रैक होने से होगा फायदा

डबल रेल ट्रैक होने से ट्रेनों को क्रासिंग के लिए रुकना नहीं पड़ता। ऐसे में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। क्रासिंग खत्म होने से रेल यात्रियों का समय बचेगा और ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी। सिंगल ट्रैक की तुलना में डबल ट्रैक पर ट्रेनों का आवागमन दोगुना हो जाता है। एक ट्रैक पर काम चलने के दौरान दूसरे ट्रैक से ट्रेन चलाई जा सकेगी।