
Bikaner Bajju Tragedy Three Real Sisters Drown In Diggi At Granthi Rohi
राजस्थान में बीकानेर के बज्जू उपखंड मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ग्रान्धी रोही में गुरुवार दोपहर को एक ही परिवार की तीन खुशियां हमेशा के लिए डिग्गी के गहरे पानी में समा गईं। खेताराम मेघवाल की तीन पुत्रियां- धापू, सुशीला और अनु- जो घर से हंसते-खेलते निकली थीं, उनके शव जब बाहर निकले तो पूरे गाँव में चीख-पुकार मच गई।
जानकारी के अनुसार, खेताराम मेघवाल का परिवार नखत बन्ना सब माइनर के टेल क्षेत्र में स्थित अपने खेत पर ही रहता है। गुरुवार दोपहर को तीनों बहनें पड़ोसी के खेत में बनी डिग्गी पर गई थीं। उनका मकसद खेत में सिंचाई करना और मवेशियों को पानी पिलाना था।
करीब तीन घंटे बीत जाने के बाद भी जब तीनों घर नहीं लौटीं, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। घर से निकलते समय उन्होंने कहा था कि वे पास के एक परिचित परिवार से मिलने भी जाएंगी, लेकिन वहां संपर्क करने पर पता चला कि वे वहां पहुँची ही नहीं थीं।
अनहोनी की आशंका होते ही ग्रामीण और परिजन डिग्गी की ओर दौड़े। पानी गहरा होने के कारण तलाश करना मुश्किल था। ग्रामीणों ने बचाव कार्य शुरू किया और शुरुआत में दो बहनों के शव मिल गए।
तीसरी बहन का पता नहीं चलने पर तुरंत जेसीबी मशीन बुलाई गई और डिग्गी की दीवार को तोड़कर पानी निकाला गया। बज्जू के स्थानीय तैराकों ने गहरे पानी में गोते लगाए और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीसरी बहन का शव भी बाहर निकाल लिया गया।
इस हादसे की सबसे दुखद बात यह है कि ये तीनों लड़कियां सगी बहनें थीं। खेताराम मेघवाल के परिवार में कुल सात बहनें और एक भाई है।
मृतका धापू (23) की शादी फलौदी जिले के लुणा गांव में हुई थी। वह मात्र तीन दिन पहले ही अपने पीहर आई थी। उसके पीछे एक मासूम पुत्र और पुत्री रोते बिलखते छोड़ गई है। दूसरी बहन सुशीला (19) और सबसे छोटी अनु (17) अभी अविवाहित थीं और अपने पिता के साथ खेती-बाड़ी में हाथ बंटाती थीं।
हादसे की सूचना मिलते ही कोलायत वृत्ताधिकारी संग्राम सिंह और बज्जू थानाधिकारी जगदीश कुमार भारी पुलिस जाब्ते के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। सरपंच रामेश्वर सुथार और पंचायत समिति सदस्य राम कुमार गोदारा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जमा हो गए। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ देर शाम तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और कागजी कार्यवाही चलती रही।
शाम ढलते-ढलते बज्जू और आसपास के गांवों में सन्नाटा पसर गया। लोग अस्पताल के बाहर जमा थे और हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी कि नियति कितनी क्रूर हो सकती है। एक ही घर से तीन अर्थियां उठने के मंजर को सोचकर ही ग्रामीणों का कलेजा फट रहा है।
Published on:
15 May 2026 08:41 am
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