
बीकानेर- शहर का यह गेट दिल्ली दरवाजा के नाम से रहा प्रसिद्ध
बीकानेर. राव बीका की ओर से 533 साल पहले बसाए गए बीकानेर की बात ही निराली है। यह शहर अपनी अलग रंगत का शहर है। शहर के अनूठे लोग, इसका आलीजापन अपने आप में इसे और भी विशिष्ट बनाता है। यह वह शहर है जो अपने अतीत के गौरव में जीता है और भविष्य के प्रति भी चौकन्ना है। रियासतकाल में दशकों पहले बनाए गए महल, गढ़, हवेलिया, कुए, तालाब आज भी शहर की विशिष्ट पहचान बने हुए है। पुराने शहर के चारो ओर बनाई गई सुरक्षा दीवार जिसे शहर परकोटा के नाम से जाना जाता है आज दशकों बाद भी उस दौर के स्वर्णिम इतिहास का जीता जागता प्रमाण बनी हुई है।
इस दीवार में बनाए गए पांच बड़े और विशाल गेट तथा आठ बारियां आज दशकों बाद भी उस दौर के साक्षी बने हुए है। शहर परकोटे में पांच गेट कोटगेट, जस्सूसर गेट, नत्थूसर गेट, शीतला गेट और गोगागेट बने हुए है। इनमें गोगागेट पहले दिल्ली दरवाजे के नाम से प्रसिद्ध रहा। बताया जाता है कि आज जहां गोगागेट है इस मार्ग से दिल्ली की ओर जाने का मार्ग होने के कारण उस दौर में इसे दिल्ली दरवाजा के नाम से जाना जाता था। बाद में लोकदेवता गोगाजी के नाम पर इस दरवाजे का नाम गोगागेट रखा गया। वहीं पुराने शहर से रास्ता कचहरी यानि कोर्ट की तरफ जाता है, इसलिए े कोट का दरवाजा के नाम से जाना गया। जो आज कोटगेट के नाम से प्रसिद्ध है। वहीं जस्सूसर गेट ध्रुव पिरोल, नत्थूसर गेट गणेश पिरोल, शीतला गेट लक्ष्मी पिरोल के नाम से प्रसिद्ध रहे।
शहर परकोटा में ये है बारिया
शहर परकोटा की दीवार में पांच गेट के साथ आठ बारियां भी बनी हुई है। ये कसाईयों की बारी, पाबूबारी, ईदगाह बारी, बेणीसर बारी, उस्तो की बारी, हमालों की बारी और बीदासर बारी के नाम से प्रसिद्ध है। शहर की चारदीवारी में स्थित बारियों के नाम और इनका इतिहास अपनी अलग पहचान रखता है।
Published on:
25 Apr 2020 12:41 pm
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