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बीकानेर – जिलाध्यक्ष बदलने की कवायद पर लगा ब्रेक

कांग्रेस : राजनीतिक गलियारों में लगाई जा रही थी अटकलें अब लोकसभा चुनाव बाद बदलाव संभव
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बीकानेर - जिलाध्यक्ष बदलने की कवायद पर लगा ब्रेक

बीकानेर.कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्षों को बदलने की अटकलों पर एकबारगी विराम लग गया है। एेसा माना जा रहा है कि अब लोकसभा चुनाव के बाद जिलाध्यक्ष बदले जाएंगे। मंगलवार को बीकानेर पहुंचे एआइसीसी के सचिव और राजस्थान सह प्रभारी काजी निजामुद्दीन ने इसका खुलासा किया।विधानसभा चुनाव के बाद बीकानेर के शहर और देहात जिलाध्यक्षों को बदलने की अटकलें जोरों पर थी। इस बीच कुछ विधायक समर्थकों ने यहां आए वरिष्ठ पदाधिकारियों से जिलाध्यक्षों को लेकर शिकायतें भी की थी।

अटकलों ने इसलिए पकड़ा जोर
विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की हार-जीत की तस्वीर साफ होने के बाद उसकी समीक्षा की गई। इसमें कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की हार का ठीकरा जिलाध्यक्षों पर फोड़ा गया। बताया जाता है कि नोखा के पूर्व विधायक रामेश्वर डूडी की हार का कारण भी देहात जिलाध्यक्ष के खिलाफ उपजे रोष को बताया गया। देहात के ही लूणकरनसर प्रत्याशी विरेन्द्र बेनीवाल, श्रीडूंगरगढ़ के मंगलाराम गोदारा को भी हार का मुंह देखना पड़ा था।

तो मिलेगी नई जिम्मेदारी
काजी निजामुद्दीन ने बताया कि फिलहाल जिलाध्यक्षों को बदलने की कोई कवायद नहीं चल रही है। अगर कहीं बदलने भी पड़े तो उन्हें नई जिम्मेदारी दी जाएगी। काजी निजामुद्दीन ने ब्लॉक अध्यक्षों के रिक्त पदों को लेकर जिला कांगे्रस से सूचना मांगी है। ज्ञात हो कि बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के एक ब्लॉक अध्यक्ष का पद करीब डेढ़ साल से रिक्त है। इसे भरने के लिए लम्बे समय से मशक्कत हो रही है, लेकिन कांग्रेस नेताओं में तालमेल के अभाव से इस पर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है।