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महंगाई बिगाड़ सकती है भुजिया का जायका

bikaner news- देश-विदेश में प्रसिद्ध बीकानेरी भुजिया को खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

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महंगाई बिगाड़ सकती है भुजिया का जायका

महंगाई बिगाड़ सकती है भुजिया का जायका

जयभगवान उपाध्याय

बीकानेर. देश-विदेश में प्रसिद्ध बीकानेरी भुजिया को खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। हर आदमी के स्वाद में शामिल बीकानेरी भुजिया पर भी महंगाई की मार पड़ सकती है। इसे बनाने के काम आने वाले मोठ-मोगर और मूंगफली तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इससे भुजिया की कीमतों और बिक्री पर भी असर पड़ सकता है। व्यापारियों को यह भी आशंका है कि कीमतें बढऩे पर उनका देश-विदेश में भुजिया का कारोबार प्रभावित हो सकता है। लिहाजा व्यापारी एक साथ कीमतें बढ़ाने की बजाय कम दाम बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, ताकि आम आदमी इसके जायके से दूर नहीं हो। जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में मोठ-मोगर 16 रुपए और मूंगफली तेल 30 रुपए प्रति किलो महंगा हुआ है। बायो डीजल व मसालों के दाम भी बढ़ गए हैं। कारोबारियों के लिए कच्चे माल की बढ़ी कीमतों से भुजिया की कीमत स्थिर रख पाना मुश्किल हो रहा है।


पिछले साल 10 रु. बढ़े
कारोबारियों ने बताया कि पिछले साल अप्रेल में भुजिया की कीमत प्रति किलो 10 रुपए बढ़ी थी। इसके बाद मोठ-मोगर, तेल की कीमत और बढ़ गई। अभी बारीक भुजिया 180 रुपए तथा मोटी भुजिया 160 रुपए प्रति किलो बिक रही है। भुजिया की कीमतें भी उसकी गुणवत्ता को देखते हुए तय की जाती हैं।


अप्रेल से बढ़ेगी मजदूरी
भुजिया कारीगरों के अनुसार वर्तमान में उन्हें 12 किलो बेसन की भुजिया बनाने पर 146 रुपए मिलते हैं। इन दरों का अनुबंध 31 मार्च, 2020 तक है। तेल और मोठ-मोगर की कीमतों में वृद्धि के साथ अप्रेल में भुजिया कारीगर मजदूरी बढ़ाने के संकेत देने लगे हैं। 12 किलो बेसन में 20 किलो बारीक भुजिया बनकर तैयार होती है, वहीं मोटी भुजिया 15 किलो ही बनती है।


मिला जीआइ टैग
बीकानेरी भुजिया की खास पहचान के लिए वर्ष 2010 में जियोग्राफिकल इन्डिकेशन (जीआइ टैग) मिल चुका है। जीआइ टैग किसी क्षेत्र विशेष के खाद्य उत्पाद की विशेषता को दर्शाता है। बीकानेर में निर्मित भुजिया को जीआइ टैग मिलने के बाद अन्य जिले या प्रदेश में बनने वाले भुजिया पर बीकानेरी भुजिया नहीं लिखा जा सकता। भुजिया-पापड़ मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रोहित कच्छावा ने बताया कि दीपावली के बाद से ही मोठ-मोगर और मूंगफली तेल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई थी। हालांकि कुछ व्यापारियों ने पहले दस रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की थी, वहीं कुछ व्यापारी कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

साख नहीं गिरने देंगे
मोठ-मोगर और मूंगफली तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद व्यापारियों ने भुजिया की गुणवत्ता को बनाए रखा है, ताकि इसकी साख बनी रहे। कुछ व्यापारियों ने अपने विवेक पर भुजिया की कीमतों में बढ़ोतरी की है। यह सही है कि व्यापारियों के मुनाफे में कमी आई है।
घेवरचंद मुसरफ, अध्यक्ष, भुजिया-पापड़ मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन


एेसे बढ़ी मोठ-मोगर की कीमतें

माह कीमत
10 मार्च 2019 60
26 अगस्त 66
26 सितम्बर 59
15 अक्टूबर 62
23 दिसम्बर 75
07 जनवरी 2020 76
(कीमतें रुपए प्रति किलो)


मूंगफली तेल पर नजर

11 मार्च 2019 102
09 अप्रेल 101
29 नवम्बर 114
16 दिसम्बर 117
07 जनवरी 2020 130
(कीमतें प्रति किलो में)