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कोरोना काल में पढ़ाई के नुकसान की भरपाई शुरू, जानिए कैसे हो रही पढ़ाई

पहले चार कालांश में इन वर्कबुकों से तथा अंतिम चार कालांश में विद्यार्थी जिस कक्षा में अध्ययनरत है, उन विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है।

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कोरोना काल में पढ़ाई के नुकसान की भरपाई शुरू, जानिए कैसे हो रही पढ़ाई

कोरोना काल में पढ़ाई के नुकसान की भरपाई शुरू, जानिए कैसे हो रही पढ़ाई

बीकानेर. कोरोना काल में विद्यार्थियों को हुए लर्निग लॉस की पूर्ति के लिए स्कूलों में शुरू किए गए Ò राजस्थान के शिक्षा में बढ़ते कदमÓ कार्यक्रम के तहत कक्षा 3 से आठवीं तक के विद्यार्थियों के बेसलाइन असेसमेंट के बाद ग्रुपों का गठन कर दिया गया है। इन ग्रुपों में विद्यार्थी के असेसमेंट के आधार पर उन्हें वर्कबुक वितरित कर उनसे प्रथम चार कालांश में अध्ययन कराया जा रहा है। स्कूलों में इस कार्यक्रम के अनुसार शिक्षण और अध्ययन हो रहा है या नहीं, इसके निरीक्षण के लिए पीईईओ से लेकर संभागीय संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी 2 सितंबर से 6 सितंबर के बीच कम से कम तीन स्कूलों में जाकर इस कार्यक्रम की क्रियान्विती तथा समीक्षा कर निदेशालय को निर्धारित प्रपत्र में सूचना भेजेंगे।लर्निग लॉस की भरपाई के लिए स्कूलों में विद्यार्थियों को पिछली कक्षाओं के तीन विषयों हिंदी, अंग्रेजी तथा गणित का विशेष रूप से अध्ययन के लिए वर्कबुकें दी गई हैं। पहले चार कालांश में इन वर्कबुकों से तथा अंतिम चार कालांश में विद्यार्थी जिस कक्षा में अध्ययनरत है, उन विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है।

ऐसे हुआ विद्यार्थियों का चयन

कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों का बेसलाइन असेसमेंट किया गया। असेसमेंट में प्राप्त अंकों को शाला दर्पण पोर्टल पर अपलोड किया गया, तो स्वत: ही विद्यार्थी को उसके असेसमेंट में प्राप्त अंकों के आधार पर ग्रुप अलॉट हो गया। इस ग्रुप अलॉटमेंट के आधार पर उन्हें विभिन्न ग्रुपों में बांटा गया और वे जिस ग्रुप तथा कक्षा स्तर के पाए गए, उन्हें उस स्तर की वर्कबुक आवंटित की गई, ताकि उन्हें इनकी सहायता से लर्निग लॉस की पूर्ति कराकर कक्षा स्तर तक लाया जा सके।

अनूठा नवाचार

राजस्थान में कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को कोरोना काल में हुए लर्निग लॉस की भरपाई के लिए राज्य में ये पहला नवाचार है, जिसमें बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी तथा गणित विषय की कमजोरियों को पहचान कर उनकी कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

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