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ग्लोबल वार्मिंग का असर: दो बार बुवाई के बाद भी नहीं उगी फसल

फिरा किसानों के सपनों पर पानी, नहरबंदी ने किया कोढ़ में खाज का काम, कर्ज में डूबे काश्तकार

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ग्लोबल वार्मिंग का असर: दो बार बुवाई के बाद भी नहीं उगी फसल

ग्लोबल वार्मिंग का असर: दो बार बुवाई के बाद भी नहीं उगी फसल

महाजन. महाजन क्षेत्र में कृषि कुओं व नहर से ङ्क्षसचाई कर फसल उत्पादन करने वाले सैकड़ों काश्तकार इस बार मौसम की प्रतिकूलता के कारण परेशान है। दो बार नरमे की बुवाई करने के बाद भी भूमि के अन्दर गर्मी अधिक होने से पौध बाहर नहीं निकल पाई है जिससे किसानों की आर्थिक हालत बिगड़ गई है। रही-सही कसर नहरबंदी ने पूरी कर दी है।


गौरतलब है कि इस बार हाड़ी के सीजन में बारिश नहीं होने से भूमि के अन्दर गर्मी कम नहीं हो पाई। तेज गर्मी ने फसल उगते ही नष्ट कर दिया। पिछले दिनों चली आंधी की मार नरमा की फसल नहीं झेल पाई है। ऊपर से नहरबंदी ने कोढ़ में खाज का काम किया है। इतनी गर्मी में समय पर फसल को ङ्क्षसचाई पानी नहीं मिल पाने से किसानों के सपनों पर पानी फिर गया है।

सैकड़ों बीघा क्षेत्र में फसल खराब
महाजन क्षेत्र के शेरपुरा, ढाणी खोडां, छिल्लां, सूंई, जैतपुर, साबणिया, ढाणी छिपलाई सहित अन्य गांवों में कृषि कुओं व नहर से भूमि को हरा-भरा करने वाले किसानों ने सैकड़ों बीघा भूमि में नरमे की बुवाई की थी लेकिन गर्मी के कारण नरमे की कोंपल भी नहीं फूट पाई। किसानों ने कुछ समय इंतजार करने के बाद एक बार फिर बुवाई की लेकिन फिर भी निराशा ही हाथ लगी। नरमे के साथ इस बार मूंगफली भी फसल आशानुरूप नजर नहीं आ रही है। किसानों के अनुसार समय पर ङ्क्षसचाई पानी उपलब्ध नहीं होने व गत एक सप्ताह से चल रही लू से फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच चुकी है।


केसीसी चुकाना मुश्किल
क्षेत्र में कृषि कुएं लगाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेने वाले किसान अब निराश है। ग्लोबल वार्मिंग से किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। दो-दो बार बुवाई के बाद भी फसल नहीं होने से हालात विकट बन गए है। ग्लोबल वार्मिंग का असर हरे चारे पर भी नजर आ रहा है। किसानों के अनुसार दिन-रात तेज तपन व अंधड़ सेफसल तो दूर पशुओं के लिए बोया हरा चारा भी तबाह हो चुका है। ऐसे में पशुओं को भी सूखा चारा खिलाया जा रहा है। राजेश सियाग ने कहा कि तापमान में बढ़ोतरी के कारण बुवाई ेेकार्य प्रभावित हुआ है। कृषि कुओं पर किसानों ने नरमें व मूंगफली की बुवाई की लेकिन तेज गर्मी ने सब कुछ चौपट करके रख दिया है।


इनका कहना है
नरमा की फसल बीमा योजना में नहीं आती है जिससे किसान फसल बीमा नहीं करवा सकते। नुकसान का आंकलन राजस्व विभाग कर रिपोर्ट तैयार कर सकता है। कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर किसानों को उचित सलाह दी जाती है।
अब्दुल अमीन, सहायक कृषि अधिकारी।