
Veterinary College
ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट कोटा (ग्राम 2017) में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय कृषक और पशुपालकों के लिए उन्नत नस्ल के पालतु पशु-पक्षियों और पशुपालन तकनीकें दिखाएगा। युवा पीढ़ी को पशु पालन क्षेत्र की संभावनाओं की जानकारी देगा।
कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने वि.वि. के डीन-डायरेक्टर को इस बारे में दिशा-निर्देश दिए हैं।ग्राम 2017 दौरान वेटरनरी विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान, बीकानेर के पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों की ओर से पशुपालकों की समस्याओं और शंकाओं का निराकरण करेगा।
स्वदेशी गौवंश की राठी, थारपाकर, कांकरेज और साहीवाल नस्लों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। मुर्गी पालन के क्षेत्र में टर्की और बतख की उपयोगिता, अधिक अंडे और मांस देने वाले राजुवास ब्रॉयलर का प्रदर्शन भी किया जाएगा। स्मार्ट फार्म टेक्नोलॉजी के तहत राजुवास की चार उन्नत तकनीकों को दर्शाया जाएगा।
हाइड्रोपोनिक्स पद्धति से हरा चारा उत्पादन की तकनीक, पशुओं के लिए पौष्टिक पशु आहार अजोला, तीसरी तकनीक के रूप में हरे चारे को साईलेज के रूप में छह माह तक संरक्षित करने की साइलो बैग तकनीक का भी प्रदर्शन किया जाएगा। पशुओं के लिए सम्पूरक आहार के रूप में तैयार यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक तकनीक भी पशुपालकों को देखने को मिलगी।
वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. जी.एस. मनोहर, वित्त नियंत्रक अरविन्द बिश्नोई, अनुसंधान निदेशक प्रो. राकेश राव, प्रसार शिक्षा निदेशक एवं ग्राम के नोडल अधिकारी प्रो. आर.के. धूडिय़ा, निदेशक क्लिनिक्स प्रो. जे.एस. मेहता आदि लेने के मूड़ में थे। और पी.एम.ई. निदेशक प्रो. आर.के. सिंह तथा प्रो. बसन्त बैस, प्रो. आर.के. जोशी और डॉ. सी.एस. ढाका इस दिशा में काम करेंगे।
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