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नौकरी बचाने के लिए साढ़े तीन माह की बच्ची को फेंका नहर में

चौथी संतान लड़की पैदा होने के बाद झंवरलाल ने तीसरी संतान के चलते नौकरी चली जाने के डर से साढ़े तीन महीन की होने पर नहर में फेंक दिया।

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नौकरी बचाने के लिए साढ़े तीन माह की बच्ची को फेंका नहर में

नौकरी बचाने के लिए साढ़े तीन माह की बच्ची को फेंका नहर में

बीकानेर. साढ़े तीन माह की बच्ची को नहर में फेंककर उसकी जान लेने के आरोप में सोमवार को पुलिस ने बच्ची की मां और पिता को गिरफ्तार किया है। आरोपी दम्पती ने छत्तरगढ़ थाना क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर की आरडी 585 पर बने पुल पर से रविवार को इस बच्ची को नहर में फेंका था। ऐसा करने के दौरान वहां से गुजर रहे दो ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद पति-पत्नी दोनों मोटरसाइकिल पर भाग निकले। ग्रामीणों ने बच्ची को नहर से बाहर निकाला, तब तक पानी में डूबने से उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने खुलासा किया है कि दियातरा निवासी मां गीता मेघवाल और पिता झंवरलाल ने खुद ही बच्ची को नहर में फेंका था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सुनील कुमार ने बताया कि आरोपी दम्पती को गिरफ्तार करने पर उन्होंने जुर्म कबूल लिया। पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव उसके दादा व नानिहाल पक्ष के लोगों को सुपुर्द कर दिया है। एएसपी ने बताया कि आरोपी झंवरलाल दियातरा के राजकीय विद्यालय में सहायक कार्मिक है। नौकरी के दौरान उसने दो बच्चे ही होने का शपथ पत्र दे रखा है। हालांकि इस बच्ची से पहले से भी उसके दस व आठ साल की दो बेटियां तथा पांच साल का एक बेटा है। बड़ी बेटी को भाई ने गोद ले रखा है। अब चौथी संतान लड़की पैदा होने के बाद झंवरलाल ने तीसरी संतान के चलते नौकरी चली जाने के डर से साढ़े तीन महीन की होने पर नहर में फेंक दिया।

पता नहीं चले, इसलिए पत्नी को पीहर छोड़ा

आरोपी ने चौथे बच्चे के जन्म को छिपाकर रखने के लिए पत्नी गीता को पीहर छतरगढ़ के चार सीएचडी गांव में छोड़ रखा था। बच्ची के पैदा होने के करीब साढ़े तीन महीने गुजर जाने के बाद रविवार को वह मोटरसाइकिल पर पत्नी को पीहर से लेकर आ रहा था। रास्ते में बच्ची को नहर में फेंक दिया।

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