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गुजरात की ऊंटनी दूध देने में अव्वल, अब बीकानेरी पर फोकस

bikaner news - Gujarat's camel tops in milking, now focus on Bikaneri
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गुजरात की ऊंटनी दूध देने में अव्वल, अब बीकानेरी पर फोकस

गुजरात की ऊंटनी दूध देने में अव्वल, अब बीकानेरी पर फोकस

उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के शोध में सामने आए नतीजे

पत्रिका एक्सक्यूसिव
बृजमोहन आचार्य

बीकानेर.

ऊष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के एक शोध में गुजरात की ऊंटनी को सर्वाधिक दूध देने वाली ऊंटनी माना गया है। वैज्ञानिकों ने भारत के विभिन्न राज्यों की ऊंटनियों के दूध संकलन और अन्य पहलुओं पर किए गए शोध के बाद यह नतीजे निकल कर आए हैं।

गुजराती ऊंटनी के ज्यादा दूध देने के कारणों पर विश£ेषण करने के बाद ऊष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने बीकानेर की ऊंटनी के दूध बढ़ाने पर काम करना शुरू कर दिया है। उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में बीकानेरी नस्ल के साथ-साथ जैसलमेरी, मेवाड़ी तथा गुजरात के कच्छ की ऊंटनी के दूध देने की क्षमता पर शोध किया था। इसमें से कच्छ की ऊंटनी ने दूध देने में सभी नस्लों को पीछे छोड़ दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार कच्छ की ऊंटनी पूरे दिन पांच लीटर दूध देती है। जबकि बीकानेरी ऊंटनी साढ़े तीन लीटर, मेवाड़ी साढ़े चार लीटर और जैसलमेरी ऊंटनी साढ़े चार लीटर दूध देती है।


50 से 80 रुपए लीटर
ऊंटनी के दूध के कीमत की बात करें तो बीकानेर व इसके आस-पास ऊंटनी का सामान्य दूध 50 रुपए प्रति लीटर एवं पॉश्च्युरिकृत दूध 80 रुपए प्रति लीटर तक विक्रय होता है। उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र ऊंटनी के दूध की कुल्फी और आइसक्रीम सहित अन्य उत्पादों को तैयार कर विक्रय करता है। केन्द्र के निदेशक आर्तबंधु साहू ने बताया कि ऊंटनी का दूध न केवल स्वास्थ्य वर्धक है, बल्कि इसे दवाइयां बनाने के लिए भी काम लिया जाता है। उन्होंने बताया कि ऊंटनी के दूध की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर राइका जाति के लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे अपने ऊंट और ऊंटनी का अच्छी तरह से ख्याल रख सकें।


बहुत ही उपयोगी
ऊंटनी का दूध मधुमेह, टीबी तथा एलर्जी रोग को नियंत्रित करने तथा विमंदित बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ आम व्यक्तियों के प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी कारगर साबित हो रहा है। चिंता की बात यह है कि ऊंटनी और ऊंट पालन धीरे-धीरे कम हो रहा है।

आर्तबंधु साहू निदेशक, उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र बीकानेर

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