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मोहरों से पूछा बताओ तुम्हारा वजीर कौन

एससी की जमीन खरीद-फरोख्त में मोहरा बने लोगों को ईडी के नोटिस

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Anushree Joshi

Aug 29, 2016

Purchase

Purchase

अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम की जमीन की खरीद-फरोख्त करने वालों के मोहरा बने एससी-एसटी के लोगों सहित जिले के करीब सौ लोगों को प्रवर्तन निदेशालय ने नोटिस भेजे हैं। नोटिस के साथ बैंक खाते की डिटेल भेजकर ईडी ने सोर्स ऑफ इनकम (पैसा कहां से आया) पूछी है।

असल में एससी-एसटी के यह लोग केवल मोहरा मात्र थे। सामान्य और ओबीसी वर्ग के लोगों ने इनके नाम से जमीन खरीदी और आगे दिल्ली-हरियाणा की कम्पनियों को बेच दी थी।

परन्तु पैसे का लेनदेन मोहरा बने एससी-एसटी के व्यक्ति के नाम से हुआ। एेसे में ईडी ने सबसे पहले उन्हें ही लपेटे में लिया है।

पर्दे के पीछे वाले तक पहुंचा ईडी

जानकारी के अनुसार मोहरा बनाए गए एससी के लोगों में से कुछ ने ईडी को नोटिस के जवाब में पर्दे के पीछे खेल करने वाले सामान्य वर्ग के व्यक्ति की जानकारी दी है।

इसी के आधार पर कुछ सामान्य और ओबीसी वर्ग के लोगों से भी ईडी ने जवाब मांगा है।

बैंक खातों से किया ट्रेस

एससी के व्यक्ति को मोहरा बनाकर उसके नाम से जमीन खरीदने वाले उसके अकाउंट में पैसा जमा करवाकर एससी की जमीन मालिक को देकर रजिस्ट्री करवाते रहे हैं। इसके लिए उनक पेनकार्ड भी जारी करवा लिए गए।

मोहरा बने व्यक्ति के नाम से छोटे-छोटे जमीन के टुकड़ों को खरीदकर दिल्ली और हरियाणा की कम्पनियों को बल्फ में जमीन बेची गई।

एेसे में बैंक ट्रांजेक्शन में जहां मोहरा बने व्यक्ति के पास जमीन खरीदने के लिए पैसा जमा होने तथा बाद में कम्पनी से भी उसी के अकाउंट में भुगतान आने की एन्ट्री दर्ज हो गई।

हालांकि उसके अकाउंट से पैसे निकालने वाला सामान्य या ओबीसी का व्यक्ति था।

बेनामी सम्पत्तियों में बड़े लोग शामिल

रॉबर्ट वाड़्रा की कम्पनी डीएलएफ के वर्ष 2011 में बीकानेर जिले में जमीन खरीद-फरोख्त के मामले की जांच के दौरान प्रदेश की जांच एजेंसियों ने ईडी से मदद मांगी थी। इस पर ईडी ने जमीनों के रिकॉर्ड को ले लिया।

वाड्रा की कम्पनी के अलावा और भी कई कम्पनियां जमीनों का खेल कर चुकी है। जबकि श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में एससी की जमीन खरीदने में कम्पनियां शामिल नहीं है।

वहां प्रशासनिक अधिकारी, बड़े जमीदार, पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधि सक्रिय है। जो एससी के व्यक्ति के नाम से जमीन खरीदकर अपने कब्जे में रखकर उससे होने वाली उपज को अपनी जमीन की उपज में शामिल कर रहे है। इससे वे आयकर छूट का लाभ भी उठा जाते हैं।

कई जिलों में चल रहा है खेल

एससी के मालिकाना हक वाली बेसकीमती सिंचित और असिंचित जमीनों को एससी के व्यक्ति के नाम से खरीदने का खेल कई जिलों में चल रहा है।

जहां हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर जिले में दस-बारह लाख रुपए प्रति बीघा की जमीन को एससी के व्यक्ति से महज एक-दो लाख रुपए प्रति बीघा की दर से सामान्य और ओबीसी वर्ग के व्यक्ति खरीद कर रहननामा अथवा

पॉवर ऑफ एटॉर्नी अथवा केसीसी का माध्यम से अपने कब्जे में रखते हैं वहीं बीकानेर जिले में नेशनल हाइवे 15 पर खासकर बीकानेर, कोलायत, पुगल तहसील और जोधपुर जिले की फलोदी तहसील में असिंचित भूमि की खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है।

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