
फोटो सोर्स: पत्रिका, मैथिली ठाकुर
गोरखपुर महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को लोक गायिका मैथिली ठाकुर पहुंची। उन्होंने पहले भजन गाया। ले चल अपनी नगरिया अवध बिहारी सांवरिया सरयू के तीर अयोध्या नगरी, सत्य भरे जहां गगरिया। इसके बाद सोहर लालना लाल होईहे हो सोहर गाया। जैसे ही उन्होंने सोहर गाया कार्यक्रम पांडाल तालियों से गूंज गया। लोग कुर्सियों से उठकर डांस करने लगे।
मैथिली ठाकुर से एक संक्षिप्त बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि गोरखपुर अंजान शहर नहीं है वे बचपन से आती रही हैं। पहली बार सीएम योगी आदित्यनाथ से गोरखपुर महोत्सव में ही मिली थी। विधायक बनने के सवाल पर उन्होंने बोला कि वह कभी नहीं सोची थीं कि एक दिन विधायक की कुर्सी पर बैठेंगी लेकिन लोगों के प्यार और आशीर्वाद से यह सम्भव हो पाया है। विधायक बनने के बाद पहली बार गोरखपुर आने को लेकर उन्होंने कहा कि मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। मैं पहले भी जब यहां आती थी तो उतना ही सम्मान और लोगों का प्यार मिलता था आज भी उस तरह मुझे प्यार मिला।
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी जिले में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र से ही शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। उनके पिता रमेश ठाकुर एक संगीत शिक्षक हैं, जिन्होंने मैथिली को घर पर ही संगीत सिखाया। मैथिली ने अपने दो भाइयों के साथ मिलकर 'ठाकुर परिवार' के नाम से यूट्यूब और सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाई।
Published on:
13 Jan 2026 11:01 pm

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