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अब ‘पहले समझौताÓ की राह चलेगी पुलिस

प्रदेश के थानों में हर साल बढ़ते लंबित मामलों से पुलिस की परेशानी बढ़ रही है। प्रदेश पुलिस के मुखिया ने लंबित मामले कम करने का नया तोड़ निकाला है। गंभीर मामलों के निस्तारण के साथ ही पुलिस अब घरेलू व साधारण प्रवृत्ति के अन्य विवादों के साथ सामान्य सड़क दुर्घटना के प्रकरणों में समझाइश से मामला निपटाने की कोशिश करेगी।
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बीकानेर. प्रदेश के थानों में हर साल बढ़ते लंबित मामलों से पुलिस की परेशानी बढ़ रही है। प्रदेश पुलिस के मुखिया ने लंबित मामले कम करने का नया तोड़ निकाला है।

गंभीर मामलों के निस्तारण के साथ ही पुलिस अब घरेलू व साधारण प्रवृत्ति के अन्य विवादों के साथ सामान्य सड़क दुर्घटना के प्रकरणों में समझाइश से मामला निपटाने की कोशिश करेगी। इससे मामले कम दर्ज होंगे और जांच अधिकारियों पर मामलों के निस्तारण का अनावश्यक दबाव भी नहीं रहेगा। इससे पुराने मामलों का निस्तारण भी शीघ्र हो सकेगा।


सामान्य प्रकृति के 75 प्रतिशत मामले
पुलिस थानों में दर्ज होने वाले कुल अपराधिक मामलों में से 75 से 80 प्रतिशत मामले सामान्य प्रकृति के होते हैं, जो आपसी विवाद के होते हैं। आपसी मतभेदों को लेकर होने वाले झगड़े, मारपीट जैसे सामान्य प्रकृति के प्रकरणों को निपटाने में दोनों पक्ष सहमत हो सकते हैं।

20 से 25 प्रतिशत प्रकरणों में पुलिस को व्यावसायिक व आदतन अपराधियों की जांच-पड़ताल करनी होती है। ऐसे में पुलिस समझौते के माध्यम से जांच अधिकारियों के लंबित मामलों के भार को कम करना चाह रही है। ऐसे प्रकरणों में परिवादी के स्वैच्छा से तैयार होने पर ही समझौता करवाया जाएगा। पुलिस थानों में इस तरह के हल्के मामलों में अगर समझौता हो जाता है पेंडेंसी घटेगी।


विशेष तवज्जो देंगे
&पुलिस महानिदेशक ने थानों में लंबित मामले कम करने के लिए समझौते वाला नया कदम उठाया है। इसकी पूरी तरह पालना की जाएगी। पुलिस पहले भी ऐसा करती रही है, लेकिन अब इसे विशेष तवज्जो दी जाएगी।
प्रदीप मोहन शर्मा, पुलिस अधीक्षक बीकानेर।

सीएलजी व आमजन का ले सकेंगे सहयोग
पुलिस सामान्य विवाद व अन्य छोटे मामलों के निस्तारण के लिए सीएलजी और आमजन की भी मदद ले सकेगी। पुलिस का मानना है कि विवाद वाले पक्षों में स्थानीय व प्रभुत्व वाले लोग आसानी से समझौता करवा सकते हैं। पुलिस ऐसे मामलों को दर्ज करने से पहले समझौते का प्रयास करेगी। वहीं किसी पक्ष के आपराधिक प्रवृत्ति के होने अथवा जघन्य अपराध होने की स्थिति में समझौते की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी।