
lock
रेलवे के विकास की यात्रा को संजोने वाला रेल संग्रहालय अधिकारियों की अनदेखी का शिकार हो गया है। वर्ष 2012 में शुरू हुआ रेल संग्रहालय कुछ महीने ही संचालित हुआ और इसके बाद ताला लग गया।
संग्रहालय में ऐतिहासिक दस्तावेज, सामग्री, उपकरण और कोच आदि रखे गए हैं। इन्हें उत्तर पश्चिम रेलवे जोन के विभिन्न कार्यालयों से संग्रहित किया गया है।
तत्कालीन मंडल रेल प्रबंधक श्याम सुन्दर गुप्ता की पहल पर तैयार किए गए संग्रहालय को अब अपने पुराने वैभव में लौटने का इंतजार है।
यह है आकर्षण का केन्द्र
वर्ष 1971 में बने निरीक्षण यान का उपयोग बीकानेर मंडल राजस्थान, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली सराय रोहिल्ला एवं दिल्ली जक्शन तक किया जाता था।
पहले यहां मीटर गेज लाइन हुआ करती थी लेकिन अब मीटर गेज पूरी तरह से बंद होने के बाद इसका उपयोग बंद हो गया।
कोयले की ढुलाई करने वाली क्रेन
वर्ष 1889 में इंग्लैंड में बनी कोयले की क्रेन को भी रेल संग्रहालय में रखा गया है। इसका उपयोग भाप के इंजन में कोयले की आपूर्ति करने के लिए किया जाता था।
भाप के इंजन में लगे टेंडर में मानव शक्ति द्वारा कोयला भरा जाता था। बताया जाता है कि तत्कालीन समय में संसाधनों के अभाव को देखते हुए रेलवे ने इंग्लैंड में बनी इस क्रेन को आयात किया था। इससे मानव शक्ति की काफी बचत होती थी।
क्रेव रेस्ट वैन
इस कोच का उपयोग आजादी पूर्व बीकानेर स्टेट रेलवे व उत्तर रेलवे गठन के बाद बीकानेर मंडल में ट्रेन क्रू के आराम करने व खाना पकाने के लिए किया जाता था। इसका निर्माण सन 1940 में किया गया था।
मेरी जानकारी में नहीं
रेल संग्रहालय में ऐतिहासिक चीजों को संजोया गया है लेकिन इसके बंद होने की जानकारी मेरे को नहीं है। अगर एेसा है तो इसे नियमित शुरू किया जाएगा, ताकि रेल इतिहास के बारे में आमजन के साथ पर्यटक एवं बच्चे भी रूबरू हो सकें।
सी.आर. कुमावत, वरिष्ठ मण्डल वाणिज्यिक प्रबंधक बीकानेर
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
