
राजस्थान पत्रिका एक्सपर्ट व्यू- आभासी आंकड़ों से ही बिगड़ता है बजट
राजस्थान पत्रिका एक्सपर्ट व्यू सुधीश शर्मा सीए
नगर निगम बजट में प्रस्तावित आय एवं व्यय के विवेचन से ज्ञात होता है कि बजट वास्तविकता से परे चलता है। बजट बनाते समय कुछ आय जो न कभी हुई न होने वाली है को बजट प्रस्तावों में शामिल कर लिया जाता है। साथ ही कुछ मदों में आय को सामान्य वृद्धि से बहुत ज्यादा बढ़ाकर दर्शाया जाता है। जो संभव तो नहीं होती दिखती लेकिन बजट का आंकड़ा बड़ा करने के लिए डाल दी जाती है। व्यय में कुछ मदों में हास्यापद प्रस्ताव भी होते है। जैसे अग्निशमन यंत्र एक लाख के प्रस्तावित है। अब यह भी सोचना चाहिए कि इस राशि से क्या यंत्र खरीदे जा सकेंगे। कुछ खर्च एेसे है जो कभी कभी हुए नहीं। मसलन एक करोड रुपए रख रखाव पर खर्च का प्रस्ताव बजट में शामिल होता रहा है।
परन्तु असल में खर्च शून्य ही रह जाता है। एेसा लगता है निगम केवल वेतन-भुगतान पर पूरा ध्यान दे रहा है। शेष मदों पर खर्च करने से बच रहा है। इसी कारण हर वर्ष के प्रस्तावित बजट से वास्तविक खर्च कम ही काम आ रहा है। एेसे में बजट पर गंभीरता से बहस के बाद बजट प्रस्तावों को पास किया जाना चाहिए। ताकि यह आभासी साबित होने की जगह वास्तविकता के करीब रहे।
Published on:
8 Feb 2019, 12:37 PM IST
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