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खेल स्टेडियम नहीं, सड़क पर दौडऩे को मजबूर युवा

खेल स्टेडियम नहीं, सड़क पर दौडऩे को मजबूर युवा
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बीकानेर

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Atul Acharya

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Updated: 26 Jun 2021, 6:50 PM IST

खेल स्टेडियम नहीं, सड़क पर दौडऩे को मजबूर युवा

खेल स्टेडियम नहीं, सड़क पर दौडऩे को मजबूर युवा

बज्जू. बज्जू सीमावर्ती क्षेत्र का सबसे बड़ा कस्बा है लेकिन यहां युवाओं के लिए खेल स्टेडियम नहीं होने से खेलों में पिछड़ रहे हैं। साथ ही सेना की भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं को सड़क पर दौड़कर अभ्यास करना पड़ रहा है जिससे हर समय दुर्घटना का अंदेशा रहता है।

कोई संसाधन नहीं
बज्जू उपखंड मुख्यालय होने के बावजूद खेल स्टेडियम नही है। कहने को एक खेल मैदान राजकीय विद्यालय में है लेकिन वहां भी स्कूल खुलने पर कोई खेल नही हो सकता है। साथ ही व्यायाम व कसरत के लिए कोई संसाधन नही है।


लम्बे समय से मांग
कस्बे में खेल मैदान नही होने के कारण सेना भर्ती सहित अन्य खेलकूद की तैयारी के लिए युवाओं को सड़क पर दौड़कर अभ्यास करना पड़ता है लेकिन सड़क पर हर समय हादसे की संभावना रहती है। पूर्व में तैयारी के दौरान दो हादसे भी हो चुके है जिससे युवाओं ने तैयारी बंद कर दी है। यहां मैदान व ट्रैक के लिए युवा करीब एक दशक से खेल स्टेडियम की मांग कर रहे है लेकिन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से आश्वासन ही मिला है। वहीं बुजुर्ग, महिला व बच्चे भी सुबह व शाम को सड़कों पर घूमने को मजबूर है।

मैदान के लिए जमीन तक नही यहां कई सरकारी विद्यालयों, कॉलेज व छात्रावास है और हर वर्ष कई खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित होती है। प्रतियोगिता के अलावा क्रिकेट, कबड्डी सहित कई प्रतियोगिता स्वयं के स्तर पर आयोजित होती है। वर्षो से प्रयासरत युवाओं को मैदान तो दूर अब तक जनप्रतिनिधि व प्रशासन स्टेडियम के लिए जमीन तक उपलब्ध नही करवा पाया है। युवाओं ने बताया कि कस्बे की गलियों व कुंड पायतन की जमीन पर खेलने को मजबूर है।


युवाओं की जुबानी
युवा महेश गोदारा, प्रकाश गवारिया, राकेश ने कहा कि बज्जू कस्बे में खेल मैदान, दौड़ के लिए ट्रैक, व्यायाम के लिए मैदान में उपकरण हो जाए तो कस्बे व क्षेत्र से प्रतिभाएं कस्बे, जिले, राज्य व देश का नाम रोशन कर सकती है लेकिन खेल स्टेडियम के अभाव रोजाना जान जोखिम में डालकर सड़क पर दौड़ लगाने को मजबूर है।