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सिम्स में स्टाफ संकट गहराया, बेड क्षमता 416 से 800 पहुंची, 1500 ओपीडी पर 344 पद खाली से मरीज परेशान

Bilaspur News: बिलासपुर का सिम्स अस्पताल इन दिनों गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। कभी 416 बेड क्षमता से शुरू हुआ यह अस्पताल अब बढ़कर 800 बेड तक पहुंच चुका है, लेकिन इसके अनुरूप स्टाफ की भर्ती नहीं हो सकी।

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मरीज परेशान (फोटो- पत्रिका)

मरीज परेशान (फोटो- पत्रिका)

CG News: बिलासपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स की तस्वीर चिंताजनक होती जा रही है। 416 बेड से शुरू हुआ यह अस्पताल अब 800 बेड तक पहुंच चुका है, जबकि ओपीडी औसतन 1500 पहुंच चुकी है। लेकिन स्टाफ की भारी कमी ने पूरी व्यवस्था को झकझोर दिया है। 344 पद खाली होने के कारण मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है और अस्पताल पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) 25 साल में भले ही सुविधाओं और बेड क्षमता के मामले में दोगुना हो गया हो, लेकिन स्टाफ की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। वर्ष 2001 में 416 बिस्तरों से शुरू हुए इस अस्पताल में अब करीब 800 बेड हैं, लेकिन कर्मचारियों की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ पाई है।

770 स्वीकृत पदों के बावजूद सिम्स में स्टाफ की भारी कमी

गौरतलब है कि जब सिम्स की स्थापना मेडिकल कॉलेज के रूप में हुई थी, तब लगभग 770 पद स्वीकृत किए गए थे। समय के साथ अस्पताल का विस्तार हुआ, मरीजों की संख्या बढ़ी, लेकिन नियमित भर्तियां नहीं होने के कारण स्टाफ की भारी कमी हो गई। सिम्स न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे संभाग, मध्यप्रदेश और ओडिशा से आने वाले मरीजों के लिए प्रमुख उपचार केंद्र है।

ऐसे में यहां सुविधाओं और स्टाफ की कमी गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। सिम्स की बढ़ती क्षमता के साथ स्टाफ और संसाधनों का विस्तार नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अगर जल्द ही बड़े स्तर पर भर्ती और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार नहीं हुआ, तो संभाग के सबसे बड़े अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

श्रेणीवार स्टाफ की स्थिति

  • प्रथम श्रेणी
  • स्वीकृत पद - 255
  • कार्यरत-135, 76 नियमित+61 संविदा
  • खाली- 118 पद
  • द्वितीय श्रेणी
  • स्वीकृत पद -144
  • कार्यरत -117, 65 नियमित+ 52 संविदा
  • खाली- 27 पद
  • तृतीय श्रेणी
  • स्वीकृत पद- 283
  • कार्यरत- 123, 107 नियमित+16 संविदा
  • खाली-160 पद
  • चतुर्थ श्रेणी
  • स्वीकृत पद -88
  • कार्यरत-49, 45 नियमित+4 संविदा
  • खाली-39 पद
  • सभी श्रेणियों को मिलाकर कुल खाली पद- 344
  • नर्सों की कमी से चरमराई व्यवस्था
  • कुल 800 बेड का अस्पताल
  • स्टाफ नर्स स्वीकृति अभी भी 450 बेड के हिसाब से
  • हर शिफ्ट में जरूरत: 75-80 नर्स
  • कुल आवश्यकता: लगभग 350 नर्स
  • वास्तविक उपलब्धता- जरूरत से काफी कम

स्टाफ नर्सों की स्थिति बेहद खराब

स्टाफ नर्सों की स्थिति बेहद खराब है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान 34 वार्ड, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर और प्रसूति वार्ड को सुचारु रूप से चलाने के लिए हर शिफ्ट में 75 से 80 नर्सों की जरूरत होती है। तीनों शिफ्ट और छुट्टियों को मिलाकर कम से कम 320 से 350 स्टाफ नर्स चाहिए, लेकिन वास्तविक संख्या इससे काफी कम है।

हालांकि 2018-19 में लगभग 100 नर्सों की भर्ती की गई थी, लेकिन रिटायरमेंट और बढ़ते दबाव के चलते यह संख्या नाकाफी साबित हो रही है। अस्पताल प्रबंधन लगातार संसाधनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन स्टाफ और अधोसंरचना की कमी से अव्यवस्था बनी हुई है।

संविदा नियुक्तियों से चलाया जा रहा काम स्टाफ की स्थायी कमी को दूर करने की जरूरत

सिम्स में बढ़ते मरीजों और बेड क्षमता की तुलना में स्टाफ की कमी वास्तव में एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उपलब्ध संसाधनों के भीतर संविदा नियुक्तियों के जरिए स्टाफ बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती हैं। अधिकांश डॉक्टर संविदा के बजाय नियमित पदों को प्राथमिकता देते हैं।

डॉ. रमणेश मूर्ति, डीन, सिम्स के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग में जब भी एनएचएम या डीएचएम के तहत नियमित भर्तियां निकलती हैं, तो डॉक्टरों का रुझान उसी ओर हो जाता है। इसके अलावा, भारतीय डॉक्टरों की विदेशों में बढ़ती मांग भी एक बड़ी वजह है, जिससे स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां प्रभावित होती हैं। ऐसी स्थिति में मेडिकल कॉलेज सिम्स में स्टाफ की स्थायी कमी को दूर करने के लिए नियमित भर्तियां शासन स्तर पर ही संभव हैं। जब तक बड़े स्तर पर स्थायी नियुक्तियां नहीं होंगी, तब तक इस कमी को पूरी तरह दूर करना मुश्किल बना रहेगा।