28 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकारी खाते से 26 लाख ट्रांसफर! कलेक्टर की कार्रवाई से बैंकिंग व्यवस्था उठे पर सवाल, जानें पूरा मामला…

CG Financial Fraud: कलेक्ट्रेट मुंगेली के पर्यावरण अधोसंरचना विकास उपकर खाते से 26 लाख 87 हजार रुपये के अनधिकृत ट्रांजेक्शन के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है।

2 min read
Google source verification
सरकारी खाते से 26 लाख ट्रांसफर! कलेक्टर की कार्रवाई से बैंकिंग व्यवस्था उठे पर सवाल, जानें पूरा मामला...(photo-AI)

सरकारी खाते से 26 लाख ट्रांसफर! कलेक्टर की कार्रवाई से बैंकिंग व्यवस्था उठे पर सवाल, जानें पूरा मामला...(photo-AI)

Mungeli Financial Fraud: छत्तीसगढ़ के कलेक्ट्रेट मुंगेली के पर्यावरण अधोसंरचना विकास उपकर खाते से 26 लाख 87 हजार रुपये के अनधिकृत ट्रांजेक्शन के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। कलेक्टर कुंदन कुमार ने मामले को गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी करार देते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, संबंधित खातासेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा में संचालित था। आरोप है कि इस खाते से बिना खाताधारक की अनुमति राशि निजी खाते में ट्रांसफर की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा, “यदि शासकीय खाते से एक सेकंड के लिए भी बिना अनुमति के राशि निजी खाते में जाती है, तो वह गंभीर धोखाधड़ी की श्रेणी में आती है।”

Mungeli Financial Fraud: राशि वापस कर दी” तर्क नहीं स्वीकार्य

मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन ने कथित रूप से यह दलील दी कि राशि बाद में वापस जमा कर दी गई। इस पर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह तर्क स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बिना अनुमति 26 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ कैसे? और यदि हुआ, तो जिम्मेदारी किसकी है?

तीन बड़े ट्रांजेक्शन, छह एंट्री

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लगभग 9 लाख, 8 लाख और करीब 6 लाख रुपये के तीन बड़े ट्रांजेक्शन किए गए। जबकि बैंक रिकॉर्ड में कुल 6 ट्रांजेक्शन दर्ज हैं। कलेक्टर ने इस विसंगति पर गंभीर आपत्ति जताई और कहा कि इतनी बड़ी राशि के लेन-देन में शाखा प्रबंधक की आईडी का उपयोग अनिवार्य होता है।

लंच टाइम” में ट्रांजेक्शन की दलील पर सवाल

बैंक की ओर से यह तर्क दिया गया कि एक कर्मचारी ने “लंच टाइम” के दौरान ट्रांजेक्शन किया। इस पर कलेक्टर ने इसे बचकाना और गैर-जिम्मेदाराना जवाब करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि शाखा प्रबंधक की आईडी के बिना ऐसा ट्रांजेक्शन संभव नहीं, तो जवाबदेही तय होना ही चाहिए। गोलमोल जवाब से बैंक प्रबंधन की भूमिका पर उठ रहे सवाल खत्म नहीं होते।

विस्तृत जांच के आदेश

जिला प्रशासन ने बैंक से विस्तृत जवाब तलब किया है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मामले ने शासकीय खातों की सुरक्षा व्यवस्था और बैंकिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।