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छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अंतर्गत प्रदेश के 7 जिला स्तरीय बैंकों से किसानों के बीते वर्ष बेचे गए धान का एक बार फिर से भुगतान हो गया। जबकि इस साल उन्होंने अभी धान बेचा ही नहीं है। ऐसा तकनीकी रूप से की गई गलती के कारण हुआ। प्रदेश के सातों जिलों में विपणन वर्ष 2022-23 में बीते वर्ष किसानों द्वारा बेचे गए धान की राशि करीब साढ़े 7 करोड़ रुपए का भुगतान होने से बैंकों में हड़कंप मच गया। अब बैंक के आला अधिकारी किसानों के खातों से राशि वापस लेने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
48 घंटे में भुगतान के आदेश में फंसे अधिकारी : राज्य शासन ने किसानों द्वारा बेचे गए धान का भुगतान हर हाल में 48 घंटे के भीतर करने के आदेश दिए हैं। सर्विस देने वाली टीसीएस कंपनी द्वारा भेजी जाने वाली फाइलें आमतौर पर देर से बैंकों में पहुंची है। इसलिए टीसीएस कंपनी ने जल्दबाजी में पुरानी फाइल को बैंकों को भेज दिया।
इस तरह हुई तकनीकी चूक : प्रदेश के जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित (रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर, अंबिकापुर और आपेक्स) में राज्य शासन ने सर्विस देने के लिए टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को काम सौंपा है। कंपनी की ओर से प्रदेश में किसानों द्वारा समितियों में बेचे जाने वाले धान का आंकड़ा एकत्रित करने के साथ उनके भुगतान के लिए प्रदेश के सभी बैंकों को फाइल भेजी जाती है। वर्ष 2022-23 में धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू हो गई है। ऐसे में समितियों में किसान धान बेचने पहुंचे रहे हैं। इसका डेटाबेस भी टीसीएस कंपनी बना रही है।
कंपनी ने किसानों को भुगतान के लिए फाइलें बैंकों को भेजना शुरू कर दिया है। इस बीच 6 नवंबर को कंपनी की ओर से बैंकों को भेजी गई फाइल में विपणन वर्ष 2021-22 में करीब साढ़े 6 हजार से अधिक किसानों द्वारा बेचे गए धान का पुराना डेटाबेस फाइलों को भेज दिया गया। बैंकों के अधिकारियों ने भी इसकी जांच नहीं की और डेटाबेस फाइल के आधार पर किसानों के खातों में राशि जमा कर दी।
आपेक्स के आईटी मैनेजर विनय मिश्रा ने इस मामले में कहा, टीसीएस कंपनी के डेटा बेस में पुरानी फाइल अपडेट की गई थी, जिससे यह स्थिति निर्मित हुई है। भुगतान फास्ट करने के जल्दबाजी में सर्विस देने वाली कंपनी ने प्रदेश के सातों बैंकोे को फाइल भेजी थी और करीब साढ़े 7 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों के खातों में हो गया। इसकी रिकवरी की जा रही है।
समितियों में धान खरीदी के रेकॉर्ड जीरो होने पर हुआ खुलासा
बैंकों के अधिकारियों को जिलों की समितियों में किसानों द्वारा विपणन वर्ष 2022-23 में बेचे गए धान की जानकारी मिली जिसमें भुगतान की गई राशि के मुकाबले धान कम था। बैंकों के अधिकारियों ने इसकी जांच तो तब पता चला कि सर्विस देने वाली कंपनी ने बीते वर्ष जिन किसानों को भुगतान किया गया था उसकी फाइल दोबारा भेज दी थी। इस कारण से भुगतान हो गया।
45-50 लाख की रिकवरी शेष
आपेक्स के ओएसडी अविनाश श्रीवास्तव ने बताया कि बैंकों के माध्यम से किसानों को पुरानी धान बिक्री की राशि का भुगतान एक बार फिर होने के बाद रिकवरी का काम शुरू किया गया था। यह राशि करोड़ों में थी, लेकिन अधिकांश रिकवरी हो गई है। शेष 45-50 लाख रुपए की वसूली शेष है।
छत्तीसगढ़ को-ऑपरेटिव सोसायटी के रजिस्ट्रार,हिम शिखर गुप्ता ने कहा बीते वर्ष हुए भुगतान की फाइल बैकों में भेजे जाने के मामले में टीसीएस कंपनी को पत्र जारी किया गया है। भविष्य में ऐसा दोबारा न हो इसके लिए कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को हिदायत दी गई है। रिकवरी जारी है। यहि रिकवरी नहीं होती है तो कंपनी के खिलाफ जुर्माना किया जाएगा और भुगतान की गई राशि की वसूली की जाएगी।
Published on:
20 Nov 2022 12:59 pm
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